मौत की सड़क बना रहा KCC! धूल के गुबार में गुम रीवा, इटौरा पुल पर अंधी दौड़ जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे बड़े सवाल

रीवा। जिले में रतहरा से चोरहटा तक बन रही फोरलेन सड़क अब विकास नहीं, विनाश की तस्वीर पेश कर रही है। निर्माण एजेंसी KCC Company पर आरोप है कि वह नियमों को कुचलते हुए काम कर रही है और प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि इटौरा विश्वविद्यालय पुल क्षेत्र में गुजरना खुद को खतरे में डालने जैसा हो गया है।
निर्माण स्थल पर उड़ती धूल ने पूरे इलाके को गैस चैंबर जैसा बना दिया है। दिन के उजाले में भी घना धूल का गुबार छा जाता है, जिससे कुछ मीटर आगे तक देख पाना मुश्किल हो जाता है। सवाल यह है कि क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि कंपनी द्वारा निर्माण के बुनियादी मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। न तो ड्रेनेज निर्माण के समय पानी का छिड़काव किया गया न ही पुल निर्माण के दौरान। अब जब इटौरा पुल पर फ्लाई ऐश डाली जा रही है तब भी बिना पानी के छिड़काव के काम जारी है। यह लापरवाही सीधे-सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है।
रिहायशी इलाके में हालात बद से बदतर हो चुके हैं। घरों के अंदर तक धूल घुस रही है लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है और बच्चे-बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं। कई बार कंपनी के जिम्मेदारों को चेताया गया शिकायतें की गईं लेकिन हर बार केवल आश्वासन देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
एक वाहन चालक ने गुस्से में बताया अचानक इतना घना धूल का गुबार उठा कि पांच मिनट तक कुछ भी नहीं दिखा। अगर ब्रेक न लगाता तो सीधे ट्रक में घुस जाता। ये सड़क नहीं मौत का जाल है। यह बयान बताता है कि स्थिति कितनी खतरनाक हो चुकी है।
सबसे बड़ा सवाल अब प्रशासन पर खड़ा हो रहा है। क्या KCC कंपनी कानून से ऊपर है? या फिर जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर इस लापरवाही पर पर्दा डाल रहे हैं? जब हर दिन हादसे का खतरा मंडरा रहा है तब भी कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों में अब आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही इस धूल आतंक पर रोक नहीं लगी और कंपनी पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
रीवा में विकास के नाम पर चल रहा यह निर्माण कार्य अब लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागेगा किसी हादसे के बाद या उससे पहले।





