
रीवा। रीवा जिले के विश्वविद्यालय क्षेत्र इटौरा में इन दिनों होटलों की आड़ में चल रही संदिग्ध गतिविधियों ने हालात को गंभीर बना दिया है। इटौरा जो कभी शैक्षणिक माहौल और छात्रों की पढ़ाई के लिए जाना जाता था अब कथित तौर पर होटल कल्चर के कारण बदनामी की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां एक-दो नहीं बल्कि अब तीन से अधिक होटल संचालित हो रहे हैं जिनमें से अधिकांश बिना वैध अनुमति के चल रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन होटलों के पास न तो कमर्शियल बिल्डिंग की स्वीकृति है न ही फायर सेफ्टी के जरूरी इंतजाम और न ही खाद्य विभाग से एनओसी इसके बावजूद ये धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। नियमों की इस खुलेआम अनदेखी ने प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इटौरा स्थित विश्वविद्यालय और आसपास के कॉलेजों के छात्र-छात्राओं की इन होटलों में लगातार आवाजाही देखी जा रही है। दिनदहाड़े युवक-युवतियां यहां पहुंचते हैं और घंटों कमरों में समय बिताते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन होटलों में सामान्य ग्राहकों के लिए चाय-पानी तक की सुविधा नहीं है वहां छात्रों की भीड़ लगी रहती है। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन होटलों का असली इस्तेमाल किस उद्देश्य से हो रहा है।
अभिभावकों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। वे अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विश्वविद्यालय और कॉलेज भेजते हैं लेकिन कई छात्र-छात्राएं कक्षाओं में जाने के बजाय इन होटलों के चक्कर लगाते नजर आ रहे हैं। इससे न केवल उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि वे गलत दिशा में भी भटक सकते हैं।
इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन और स्कूल-कॉलेज प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या उन्हें इस गतिविधि की जानकारी नहीं है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? यदि संस्थान सख्ती से छात्रों की उपस्थिति और गतिविधियों पर निगरानी रखें तो ऐसी स्थिति पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।
प्रशासन की चुप्पी भी कम हैरान करने वाली नहीं है। इतने बड़े स्तर पर नियमों का उल्लंघन और संदिग्ध गतिविधियों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होना कई आशंकाओं को जन्म देता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कहीं न कहीं अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण ही ये होटल बेखौफ संचालित हो रहे हैं।
शहरवासियों और अभिभावकों ने मांग की है कि विश्वविद्यालय क्षेत्र इटौरा में संचालित सभी होटलों की तत्काल जांच कराई जाए। जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैंl उन्हें तुरंत सील किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही शिक्षा संस्थानों को भी जिम्मेदारी तय करते हुए छात्रों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए जाएं।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब जागेगा या फिर यूं ही विश्वविद्यालय क्षेत्र इटौरा में होटल कल्चर की आड़ में युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रहेगा।





