बकरियों से भरा वाहन पकड़ना पड़ा भारी? पुलिस लाइन में पदस्थ उपनिरीक्षक से कराई गई कार्रवाई

थाने का काम पुलिस लाइन के जिम्मे? बकरियों से भरे वाहन की कार्रवाई ने खोले कई सवाल
रीवा। रीवा पुलिस महकमे में इन दिनों बकरियों से भरे एक वाहन पर हुई कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार रात्रि गश्त के दौरान पुलिस लाइन में पदस्थ एक उपनिरीक्षक और उनकी टीम ने संदिग्ध परिस्थितियों में जा रहे बकरियों से भरे वाहन को रोककर पकड़ा था। बताया जाता है कि वाहन की तेज और अनियंत्रित रफ्तार के कारण गश्ती दल के पुलिसकर्मी भी बाल-बाल बच गए थे जिसके बाद वाहन को रोककर आगे की कार्रवाई के लिए सिविल लाइन थाना लाया गया। सूत्रों की मानें तो वाहन पकड़कर थाने पहुंचने के बाद मामला उस समय चर्चा में आ गया जब गश्त में तैनात उपनिरीक्षक को ही पूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी से कहा गया कि चूंकि वाहन उन्होंने पकड़ा है इसलिए प्रकरण की समस्त कानूनी प्रक्रिया भी वही पूरी करें। इसके बाद उपनिरीक्षक ने आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई और अन्य औपचारिकताएं पूरी कीं।
पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल
पुलिस सूत्रों के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में गश्ती दल द्वारा पकड़े गए वाहन आरोपी अथवा जब्त सामग्री को संबंधित थाना क्षेत्र के सुपुर्द किया जाता है। इसके बाद अपराध पंजीबद्ध करने से लेकर विवेचना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित थाने की होती है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस मामले में स्थापित प्रक्रिया का पालन किया गया या फिर किसी विशेष परिस्थिति में अलग व्यवस्था अपनाई गई।
क्या अब पुलिस लाइन के कर्मचारियों से भी कराया जाएगा थानों का काम?
मामले को लेकर पुलिस विभाग के अंदर भी तरह-तरह की चर्चाएं सुनाई दे रही हैं। पुलिस कर्मियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि पुलिस लाइन में पदस्थ अधिकारी और कर्मचारियों से ही थानों की कार्रवाई कराई जाएगी तो फिर संबंधित थाना स्टाफ की भूमिका क्या रह जाएगी? कई कर्मचारियों का मानना है कि पुलिस लाइन का मूल कार्य प्रशासनिक रिजर्व और विशेष ड्यूटी से जुड़ा होता है जबकि थाना स्तर की कानूनी कार्रवाई के लिए अलग स्टाफ और व्यवस्था मौजूद रहती है।
सीएसपी स्तर की महिला अधिकारी की भूमिका पर भी चर्चा
पुलिस सूत्रों के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम के बाद सिविल लाइन क्षेत्र की सीएसपी रैंक की महिला अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभाग के भीतर यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या पूर्व में भी इसी प्रकार गश्ती दलों या पुलिस लाइन में पदस्थ कर्मचारियों से थाने स्तर की कार्रवाई कराई जाती रही है या यह कोई नया प्रयोग है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है लेकिन पुलिस महकमे के भीतर उठ रही चर्चाओं ने कई प्रशासनिक सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। यदि गश्ती दल कार्रवाई में ही उलझे रहेंगे तो नियमित गश्त, अपराध नियंत्रण और संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां प्रभावित हो सकती हैं। अब देखना यह होगा कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले को किस नजरिए से देखते हैं और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं या नहीं।





