
संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन दिल्ली का जंतर-मंतर अचानक तनाव का केंद्र बन गया। प्रस्तावित संसद मार्च से पहले प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प ने माहौल को गर्मा दिया। इसके बाद पूरे इलाके में सुरक्षा और भी कड़ी कर दी गई।
संसद मार्च से पहले बढ़ा तनाव
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने संसद तक विरोध मार्च का आह्वान किया था। इसी बीच जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्र हुए। मार्च शुरू होने से पहले ही मौके पर अफरा-तफरी और धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। हालात बिगड़ने पर सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की।
सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प
मौके पर तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अन्य सुरक्षा बलों की प्रदर्शनकारियों के साथ झड़प हुई। इसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया गया। इस दौरान कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें सुरक्षा कर्मी प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने का प्रयास करते दिखाई दे रहे हैं। घटना के बाद CJP ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए कार्रवाई पर आपत्ति जताई और इसे संविधान की भावना के विपरीत बताया।
दिल्ली में हाई अलर्ट, मेट्रो स्टेशन बंद
मॉनसून सत्र और प्रस्तावित विरोध मार्च को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई। एहतियात के तौर पर दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने राजीव चौक, जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और सेवा तीर्थ सहित कई मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद कर दिया। इससे यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने की सलाह दी गई।
पुलिस का बयान और धारा 163 लागू
दिल्ली पुलिस के अनुसार प्रस्तावित संसद मार्च के लिए न तो अनुमति मांगी गई थी और न ही प्रशासन ने इसकी इजाजत दी थी। नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है। डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता है और किसी भी अनधिकृत जुलूस या मार्च की अनुमति नहीं दी जाएगी।
संसद के मॉनसून सत्र के साथ राजधानी में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। एक ओर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर हैं, वहीं प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रदर्शन और प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।





