कल्पना मिश्रा कांड में नया मोड़: 2023 के सरकारी आदेश से उठे सवाल, राहुल मिश्रा पर कार्रवाई के बाद डीन डॉ. सुनील अग्रवाल के इस्तीफे की मांग तेज

परिजन अमरण अनशन पर हमें पैसा नहीं, इंसाफ चाहिए
रीवा। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) में कल्पना मिश्रा और उसके नवजात शिशु की मौत का मामला अब अस्पताल की चिकित्सकीय व्यवस्था से लेकर प्रशासनिक जवाबदेही तक गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा को हटाकर डॉ. प्रियंका शर्मा को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद मृतका के पिता और परिजन अमरण अनशन पर हैं। उनकी मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच कर उपचार और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सभी जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए। परिजनों का कहना है कि उन्हें आर्थिक सहायता नहीं चाहिए बल्कि अपनी बेटी और नवजात के लिए न्याय चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है हमें पैसा नहीं चाहिए हमें इंसाफ चाहिए।
अमरन अनशन के समर्थन में कांग्रेस और समाजसेवियों का जुटान
पीड़ित परिवार के समर्थन में अब राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मौजूदगी भी लगातार बढ़ रही है। अमरण अनशन स्थल पर कांग्रेस पिछड़ा वर्ग के राष्ट्रीय समन्वयक कुँवर सिंह पटेल, कांग्रेस प्रवक्ता विनोद शर्मा, पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी, समाजसेवी अविराज, आम आदमी पार्टी के नेता प्रमोद शर्मा सहित कई समाजसेवी पहुंचे।
समर्थन में पहुंचे लोगों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन किया और कहा कि कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच और वास्तविक जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर चिकित्सकीय अथवा प्रशासनिक लापरवाही जांच में सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
2023 के सरकारी आदेश ने फिर खोली पुरानी फाइल
मामले में सामने आए मध्यप्रदेश शासन, चिकित्सा शिक्षा विभाग के 7 मार्च 2023 के आदेश ने भी SGMH की पुरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। आदेश में श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय एवं उससे संबंधित शासकीय अस्पताल की जांच के बाद की गई कार्रवाई का उल्लेख है। इसमें जांच समिति के निष्कर्षों के आधार पर डॉ. बीनू सिंह की तीन वेतन वृद्धियां रोकने तथा डॉ. सोनल अग्रवाल को सेवा से पृथक करने का निर्णय दर्ज है। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि वर्ष 2023 में जांच के बाद सोनल अग्रवाल के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया गया था तो उसके बाद अस्पताल की चिकित्सकीय व्यवस्था और संबंधित जिम्मेदारियों की विभागीय समीक्षा किस स्तर पर हुई?
अगर समय पर कार्रवाई होती तो क्या आज कल्पना जिंदा होती?
परिजनों का सवाल है कि पूर्व में सामने आई कमियों पर यदि प्रभावी कार्रवाई और निगरानी की गई होती तो क्या आज उनकी बेटी जिंदा होती? हालांकि कल्पना की मौत के लिए किसी एक अधिकारी या डॉक्टर को सीधे जिम्मेदार ठहराना जांच के निष्कर्ष के बिना उचित नहीं होगा लेकिन परिजनों का कहना है कि घटना की पूरी कड़ी की जांच जरूरी है। उनका सवाल है क्या डीन ने अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाई? क्या वरिष्ठ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित थी? क्या ऑपरेशन में शामिल सभी डॉक्टरों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई?
राहुल मिश्रा ने भी रखा अपना पक्ष
वहीं डॉ. राहुल मिश्रा ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को लेकर अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद वे अस्पताल पहुंचे और उनकी मौजूदगी में कल्पना को CPR दी गई।
उनका कहना है कि उन्होंने धर्मेंद्र मिश्रा से यह कहा था कि 22 साल की उम्र में पहली डिलीवरी होने के कारण मरीज को लगातार डॉक्टर की निगरानी में रखा जाना चाहिए था। राहुल मिश्रा ने कहा कि उनकी बात का उद्देश्य किसी को अपमानित करना नहीं था और यदि उनकी बात का गलत अर्थ निकला तो वे उसके लिए माफी मांग चुके हैं।
आर्थिक लेन-देन के आरोपों को खारिज करते हुए उनका कहना है कि उन्होंने अपने लिए एक रुपये की भी मांग नहीं की। उनके अनुसार उनकी जिम्मेदारी नर्सिंग स्टाफ तक थी जबकि डॉक्टरों की चिकित्सकीय जिम्मेदारी अलग स्तर पर निर्धारित होती है।
डीन के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग
कल्पना प्रकरण के बाद कांग्रेस की ओर से डीन डॉ. सुनील अग्रवाल के इस्तीफे की मांग को लेकर सक्रियता जारी है। सामाजिक कार्यकर्ता भी डीन की कथित प्रशासनिक लापरवाही में निलंबन और दोष पाए जाने पर FIR दर्ज करने की मांग कर रहे हैं।
वहीं परिजन ऑपरेशन में शामिल सभी चिकित्सकों की भूमिका की जांच चाहते हैं। उनका कहना है कि मरीज की गंभीर स्थिति, वरिष्ठ डॉक्टरों की उपलब्धता, उपचार की टाइमलाइन, ऑपरेशन के दौरान लिए गए निर्णय और आपातकालीन व्यवस्था की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।





