कल्पना मिश्रा कांड में राहुल मिश्रा पर कार्रवाई के बाद अब डीन की भूमिका पर उठे सवाल, क्या CM करेंगे अगली कार्रवाई? SGMH में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद प्रशासन ने अधीक्षक बदला, लेकिन डीन की जिम्मेदारी पर अब तक खामोशी क्यों?

रीवा। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय (SGMH) में कल्पना मिश्रा और उसके नवजात शिशु की मौत का मामला लगातार गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामले में डॉ. राहुल मिश्रा को अधीक्षक पद से हटाकर डॉ. प्रियंका शर्मा को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद अब अस्पताल की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या जिम्मेदारी केवल अधीक्षक तक सीमित रहेगी या अस्पताल के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों, विशेषकर डीन की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी?
कल्पना मिश्रा प्रकरण ने SGMH की उस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं जिसमें मरीज की हालत बिगड़ने के बाद परिजनों को समय पर वरिष्ठ चिकित्सक की उपलब्धता और निर्णय लेने वाली टीम तक पहुंचने में परेशानी होने के आरोप सामने आए हैं। परिजनों के मुताबिक, कल्पना की हालत बिगड़ने के बाद रात करीब 11 बजे से लगातार हंगामा और मदद की गुहार चलती रही लेकिन इस दौरान अस्पताल के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी और सक्रियता को लेकर सवाल बने रहे।
डीन सिर्फ ऑफिस तक सीमित?
अब चर्चा इस बात की है कि इतने बड़े अस्पताल का डीन आखिर मरीजों की वास्तविक स्थिति और ऑन-ड्यूटी व्यवस्था पर कितनी निगरानी रखता है? अस्पताल में कौन वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद है, कौन छुट्टी पर है, कौन ऑपरेशन कर रहा है और किस मरीज की हालत गंभीर है क्या इसकी नियमित मॉनिटरिंग होती है?
लोगों का आरोप है कि SGMH जैसी बड़ी चिकित्सा व्यवस्था में कई बार गंभीर मरीजों की जिम्मेदारी जूनियर डॉक्टरों के भरोसे छोड़ दी जाती है। यदि ऐसा है तो सवाल केवल किसी एक डॉक्टर का नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था का है।
मुख्यमंत्री की ड्यूटी में भी उठ चुके हैं सवाल
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि मुख्यमंत्री की SGMH ड्यूटी के दौरान भी वरिष्ठ चिकित्सकों की उपलब्धता और व्यवस्थाओं को लेकर लापरवाही का मामला सामने आया था। आरोप है कि महत्वपूर्ण ड्यूटी के दौरान जूनियर डॉक्टरों के भरोसे व्यवस्था संचालित कराई गई। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक जांच रिपोर्ट या जिम्मेदारी तय होने की पुष्टि सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। यदि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद की ड्यूटी में भी वरिष्ठ चिकित्सकीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं तो फिर आम मरीजों की सुरक्षा और उपचार व्यवस्था की निगरानी कितनी प्रभावी है यह बड़ा सवाल है।
राहुल मिश्रा पर कार्रवाई, लेकिन क्या पूरी तस्वीर सामने आई?
डॉ. राहुल मिश्रा को हटाए जाने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कल्पना मिश्रा प्रकरण की पूरी जिम्मेदारी केवल एक अधिकारी पर तय करना उचित है? मृतका की बहन द्वारा कथित तौर पर राहुल मिश्रा के पक्ष में यह बात कही गई कि उन्होंने परिवार की मदद की और किसी आर्थिक लेन-देन की बात नहीं की।
वायरल बताए जा रहे वीडियो को लेकर भी परिजनों की अलग व्याख्या सामने आई है। उनके अनुसार वीडियो में राहुल मिश्रा यह कहते दिखाई दे रहे हैं कि यदि उन्हें कल्पना की गंभीर स्थिति की सही जानकारी समय पर मिलती तो वह पूरी टीम लगाकर इलाज कराते। ऐसे में वीडियो और घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है।
अब शासन से सीधा सवाल डीन की जवाबदेही कब?
कल्पना मिश्रा की मौत ने SGMH की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अधीक्षक बदले जाने के बाद अब निगाहें शासन और मुख्यमंत्री पर हैं। क्या जांच की आंच डीन तक भी पहुंचेगी? क्या अस्पताल में वरिष्ठ डॉक्टरों की उपलब्धता ऑन-ड्यूटी व्यवस्था और आपातकालीन निर्णय प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच होगी? क्योंकि अगर अस्पताल की व्यवस्था में कहीं ऐसी खामी थी जिसकी वजह से गंभीर मरीज को समय पर उचित वरिष्ठ चिकित्सकीय सहायता नहीं मिल सकी तो जवाबदेही भी केवल एक पद या एक डॉक्टर तक सीमित नहीं होनी चाहिए।





