जंतर-मंतर आंदोलन में छात्रों पर दर्ज FIR रद्द, सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे को लेकर भी दिया बड़ा आदेश

जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध को अपराध की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। साथ ही, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की नीति बनाने का निर्देश दिया।
छात्रों पर दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में छात्रों के आंदोलन के दौरान दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अगर इन्हीं घटनाओं से संबंधित किसी अन्य राज्य में भी FIR दर्ज है और उसकी जानकारी अभी अदालत के सामने नहीं आई है, तो उस पर भी कार्रवाई रोकने की दिशा में कदम उठाए जाएं।
13 FIR में हजारों छात्र हुए थे शामिल
अदालत में बताया गया कि 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में हजारों छात्रों ने आंदोलन में हिस्सा लिया था। इस दौरान पुलिस ने कुल 13 FIR दर्ज की थीं। मामले में दिल्ली, महाराष्ट्र, असम, बिहार और पश्चिम बंगाल से जुड़े आवेदन भी अदालत के सामने रखे गए।
2,873 लोगों पर नई FIR का जिक्र
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली पुलिस पुराने आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज कर सकती है। हालांकि, अदालत को बताया गया कि आंदोलन में शामिल होने के आधार पर अब कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी तरह का निर्देश सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए लागू करने की बात कही।
विरोध प्रदर्शन को अपराध की तरह न देखें
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अपने आप में अपराध नहीं माना जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि सरकार भी चाहती है कि छात्रों को किसी तरह का नुकसान न हो। इस रुख से आंदोलन से जुड़े छात्रों को बड़ी कानूनी राहत मिलने की उम्मीद है।
आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा
NEET परीक्षा 2026 के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के मुआवजे का मुद्दा भी सुनवाई में उठा। कोर्ट को बताया गया कि इस संबंध में तीन महीने के भीतर नीति तैयार की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि नीति तीन महीने में पूरी कर प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिया जाए।
सौरभ दास ने जताया आभार
सुनवाई के दौरान सौरभ दास भी अदालत में मौजूद थे। उन्होंने आंदोलन वापस लेने का भरोसा दिया और हाथ जोड़कर न्यायाधीशों को धन्यवाद दिया। CJI सूर्यकांत ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। अदालत के इस फैसले से एक ओर प्रदर्शन से जुड़े कानूनी मामलों पर विराम लगाने की कोशिश हुई है, वहीं दूसरी ओर छात्रों और उनके परिवारों को लेकर सरकार की जवाबदेही का मुद्दा भी सामने आया है।
फैसले का व्यापक संदेश
सुप्रीम कोर्ट का आदेश छात्रों के विरोध प्रदर्शन और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के बीच संतुलन की महत्वपूर्ण बहस को सामने लाता है। अदालत ने एक तरफ FIR पर राहत दी है, तो दूसरी तरफ आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की समयसीमा तय की है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र और राज्य सरकारें इन निर्देशों को जमीन पर कितनी तेजी से लागू करती हैं।





