अखिलेश यादव पर बरसे ओम प्रकाश राजभर, बोले- एसी-पीसी छोड़िए और जमीन पर आइए महाराज

उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर फिर तेज हो गया है। सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को सीधे निशाने पर लेते हुए जमीन पर उतरकर जनता के बीच जाने की चुनौती दी। राजभर ने अखिलेश के पुराने कार्यकाल पर भी कई गंभीर सवाल उठाए।
राजभर का सीधा हमला
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल एसी कमरे में बैठकर प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के जरिए चुनाव नहीं जीता जा सकता।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अखिलेश भाई, कब तक ये हवाबाजी चलती रहेगी। एसी और पीसी से ही चुनाव लड़ लेंगे?” राजभर ने सपा अध्यक्ष से जनता के बीच जाकर राजनीतिक ताकत दिखाने की चुनौती दी।
‘जमीन पर आइए महाराज’
राजभर ने कहा कि वह अखिलेश यादव के साथ राजनीतिक मुकाबले के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि एकतरफा चुनाव में मजा नहीं आता और अखिलेश को सीधे जनता का सामना करना चाहिए।
उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या अखिलेश यादव अपने पुराने कार्यकाल की वजह से जनता के बीच जाने से बच रहे हैं। राजभर का यह बयान यूपी की चुनावी राजनीति में बढ़ती तल्खी का संकेत माना जा रहा है।
2012-2017 के शासन पर निशाना
सुभासपा अध्यक्ष ने अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते 2012 से 2017 के कार्यकाल को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने दंगे, अपराध, भ्रष्टाचार, लूट-खसोट और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे मुद्दों का उल्लेख करते हुए तत्कालीन सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
राजभर ने दावा किया कि लोग उस दौर को अब भी भूले नहीं हैं। हालांकि, ये आरोप राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और इन पर समाजवादी पार्टी का पक्ष अलग हो सकता है।
कार्यकर्ताओं के परिवारों पर भी टिप्पणी
राजभर ने अखिलेश यादव के कार्यकर्ताओं के परिवारों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि पुराने शासनकाल को लेकर कुछ कार्यकर्ताओं के घरों में डर का माहौल था।
इसके साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया और प्रेस कॉन्फ्रेंस की राजनीति पर निशाना साधते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति जानने के लिए जमीन पर उतरना जरूरी है।
चुनावी मुकाबले का बढ़ता तापमान
राजभर और अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक टकराव पहले भी सामने आता रहा है। लेकिन चुनावी माहौल बनने के साथ बयान अब व्यक्तिगत और अधिक आक्रामक होते दिखाई दे रहे हैं।
राजभर के बयान का मूल संदेश यही है कि चुनाव सिर्फ सोशल मीडिया या मीडिया की सुर्खियों से नहीं, बल्कि बूथ, संगठन और जनता के बीच मौजूदगी से लड़ा जाता है।
अब जनता की बारी
राजनीतिक आरोपों और पलटवारों के बीच यूपी की जनता के सामने आने वाले दिनों में कई दावे रखे जाएंगे। हर दल अपने शासन, संगठन और नीतियों को बेहतर बताने की कोशिश करेगा।
आखिरकार चुनावी मैदान में किसकी पकड़ मजबूत है, इसका फैसला मंचों के भाषण नहीं बल्कि जनता का वोट करेगा। राजभर की चुनौती के बाद अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि अखिलेश यादव इसका क्या जवाब देते हैं।





