जच्चा-बच्चा मौत मामले में अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा रहे फ्रंटलाइन पर, बोले लापरवाही करने वाला कोई भी हो, कार्रवाई होगी

रात 12 से सुबह 4 बजे तक अस्पताल में परिजनों के बीच मौजूद रहे अधीक्षक, डीन और ऑन-ड्यूटी डॉक्टर की मौजूदगी पर उठे सवाल
रीवा। संजय गांधी अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा और नवजात की मौत के बाद जहां परिजनों के आरोपों और वायरल वीडियो ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, वहीं पूरे घटनाक्रम के दौरान अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा की भूमिका चर्चा में रही। घटना की जानकारी मिलते ही डॉ. मिश्रा तत्काल फ्रंटलाइन पर पहुंचे और परिजनों से मुलाकात कर उन्हें भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी तथा लापरवाही सामने आने पर संबंधित स्टाफ के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. राहुल मिश्रा ने स्पष्ट तौर पर कहा कि लापरवाही बरतने वाले किसी भी स्टाफ को नहीं छोड़ा जाएगा, चाहे वह कोई भी हो। उन्होंने कहा कि जांच में जिसकी भी जवाबदारी सामने आएगी, उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं जिस नर्स पर परिजनों द्वारा बदतमीजी करने के आरोप लगाए गए हैं, उसके संबंध में भी उन्होंने तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया।
प्रथम दृष्टया दो नर्स और दो ड्यूटी डॉक्टर निलंबित
मामले में प्रथम दृष्टया कार्रवाई करते हुए दो नर्सों सहित दो ड्यूटी डॉक्टरों को निलंबित किया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जांच के दौरान जो भी कर्मचारी या अधिकारी दोषी पाए जाएंगे उनके विरुद्ध नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। निलंबन की कार्रवाई को प्रारंभिक कदम माना जा रहा है और जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी।
रातभर परिजनों के बीच मौजूद रहे अधीक्षक
घटना के बाद रात करीब 12 बजे से सुबह लगभग 4 बजे तक अस्पताल परिसर में डॉ. राहुल मिश्रा लगातार सक्रिय नजर आए। परिजनों को समझाने, स्थिति की जानकारी लेने और संबंधित स्टाफ से जवाब लेने की प्रक्रिया में वे फ्रंटलाइन पर दिखाई दिए। दूसरी ओर इस दौरान डीन और ऑन-ड्यूटी डॉक्टर सोनल अग्रवाल की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे संवेदनशील मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी और जवाबदेही को लेकर अस्पताल प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
वायरल वीडियो की बात का भी दिया संदर्भ
मामले से जुड़े वायरल वीडियो में उम्र को लेकर की गई बातचीत को लेकर भी अलग-अलग तरह की चर्चाएं सामने आई हैं। वीडियो में कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा रहा है कि कम उम्र में गर्भधारण अथवा प्रसव कुछ परिस्थितियों में जोखिमपूर्ण हो सकता है और मरीज को समय देना चाहिए।
हालांकि डॉ. राहुल मिश्रा की ओर से स्पष्ट किया गया कि यह बात संबंधित महिला को लेकर नहीं कही जा रही थी बल्कि आपसी बातचीत के संदर्भ में कही गई थी। उनका कहना था कि चिकित्सकों का दायित्व है कि वे लोगों को स्वास्थ्य और प्रसव से संबंधित जोखिमों के प्रति जागरूक करें, लेकिन इस बातचीत को मृतका की व्यक्तिगत स्थिति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
मरीज का सफल इलाज हमारी पहली प्राथमिकता
डॉ. राहुल मिश्रा ने कहा कि संजय गांधी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले प्रत्येक मरीज की पहली प्राथमिकता बेहतर और सफल उपचार उपलब्ध कराना है। अस्पताल में आने वाले मरीज और उनके परिजन चिकित्सकों पर भरोसा करते हैं और उस विश्वास को कायम रखना डॉक्टरों का पहला कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी डॉक्टर या स्टाफ की लापरवाही जांच में सामने आती है तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। किसी भी कर्मचारी को केवल पद या प्रभाव के आधार पर संरक्षण नहीं दिया जाएगा।
यह घटना हमारे लिए बेहद दर्दनाक
अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने जच्चा और नवजात की मौत को बेहद दर्दनाक घटना बताते हुए कहा कि इस तरह की घटना अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकीय टीम के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले में जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर जवाबदेही तय की जाएगी।
अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
संजय गांधी अस्पताल में प्रसव के दौरान महिला और उसके नवजात की मौत के मामले में परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही सहित कई गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं सामने आए वीडियो और घटनाक्रम को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में अब सबसे महत्वपूर्ण यह है कि जांच कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी होती है तथा मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार प्रक्रिया, ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ की भूमिका की जांच के बाद किसकी जवाबदारी तय होती है।





