प्रसव के दौरान लापरवाही का आरोप, मां और नवजात की मौत: परिजनों ने डॉक्टर-नर्स पर अभद्रता व धमकी के लगाए आरोप, FIR और मेडिकल जांच की मांग

रीवा। गांधी स्मारक चिकित्सालय (SGMH) रीवा में प्रसव के दौरान महिला कल्पना मिश्रा और उसके नवजात शिशु की मौत का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। मृतका के परिजनों ने उपचार में कथित लापरवाही, अभद्र व्यवहार और धमकी के आरोप लगाते हुए संबंधित डॉक्टर एवं नर्स के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ FIR दर्ज करने की मांग की है। वहीं अस्पताल में मौजूद ऑन-ड्यूटी डॉक्टर द्वारा मीडिया कर्मी को दी गई जानकारी ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। परिजनों के अनुसार प्रसव के दौरान अस्पताल की ओर से बार-बार ब्लड लाने के लिए कहा गया। परिजन ब्लड की व्यवस्था कर अस्पताल पहुंचे और उनके अनुसार ब्लड अस्पताल में उपलब्ध भी कराया गया। इसके बावजूद कल्पना मिश्रा और उसके नवजात शिशु की जान नहीं बच सकी। परिजनों का आरोप है कि जिस समय मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल और गंभीर उपचार की आवश्यकता थी उस समय उनके साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया।
परिजनों ने डॉक्टर सोनल अग्रवाल एवं संबंधित नर्स के व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल में इलाज को लेकर उन्हें बार-बार परेशान किया गया तथा कथित तौर पर गाली-गलौज और धमकी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। मृतका के पिता ने पुलिस को दिए आवेदन में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने CCTV फुटेज और सभी मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित कराने तथा जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है।
ऑन-ड्यूटी डॉक्टर के बयान से बढ़े सवाल
मामले की जानकारी लेने पहुंचे मीडिया कर्मी द्वारा जब ऑन-ड्यूटी डॉक्टर से डॉक्टर सोनल अग्रवाल के संबंध में पूछा गया तो डॉक्टर ने बताया कि जब सोनल अग्रवाल की जरूरत होती है तब वह आती हैं और ऑपरेशन के बाद चली जाती हैं। मीडिया कर्मी ने जब डॉक्टर सोनल अग्रवाल से मिलने की बात कही तो ऑन-ड्यूटी डॉक्टर ने स्वयं कहा कि जब जरूरत होती है तब आती हैं अभी जरूरत नहीं है। साथ ही बताया गया कि उनकी ड्यूटी रात 8 बजे तक है।
ऑन-ड्यूटी डॉक्टर के इस कथित बयान को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि यदि संबंधित चिकित्सक की ड्यूटी निर्धारित समय तक है तो मरीजों के उपचार के दौरान उनकी उपलब्धता और जिम्मेदारी किस प्रकार तय की जाती है। हालांकि, डॉक्टरों की ड्यूटी व्यवस्था और घटना के दौरान किस चिकित्सक की क्या जिम्मेदारी थी यह अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड एवं जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मेडिकल बोर्ड से जांच की मांग
परिजनों ने मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड से कराई जाए ताकि मां और नवजात की मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता चल सके। उन्होंने उपचार से जुड़े सभी मेडिकल रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, ब्लड संबंधी दस्तावेज, दवाइयों का विवरण, नर्सिंग रिकॉर्ड, डिलीवरी/ऑपरेशन रिकॉर्ड सहित अन्य दस्तावेज सुरक्षित कराने की मांग की है। साथ ही अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर संबंधित वार्ड और परिसर की CCTV फुटेज तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की गई है ताकि महत्वपूर्ण साक्ष्य नष्ट या ओवरराइट न हो सकें।परिजनों ने स्पष्ट मांग की है कि यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही उपचार में गंभीर चूक अभद्र व्यवहार या अन्य आरोप सही हैं तो संबंधित डॉक्टर एवं नर्स के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ FIR दर्ज की जाए।





