NHAI टोल वसूली में कथित गड़बड़ी, अनधिकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल पर ED की रेड

फर्जी रसीदों और अनधिकृत सॉफ्टवेयर के जरिए टोल की रकम सरकारी रिकॉर्ड से बाहर रखने के आरोपों की जांच तेज हो गई है। ED ने PMLA के तहत सात राज्यों और क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई करते हुए डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटाने की कवायद शुरू की है।
14 ठिकानों पर एक साथ पहुंची ED की टीम
फर्जी तरीके से टोल वसूली और उससे हासिल रकम को सरकारी हिसाब-किताब से बाहर रखने के कथित मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2 सितंबर को बड़ी कार्रवाई की। ED के लखनऊ जोनल ऑफिस की टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत 14 ठिकानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया।
इस कार्रवाई का फोकस उन लोगों और संस्थाओं पर है, जिन पर कथित तौर पर टोल वसूली में अनियमितताओं से फायदा उठाने का संदेह है।
सात राज्यों और क्षेत्रों में जांच का दायरा
ED की कार्रवाई उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, जम्मू, मध्य प्रदेश, NCR और कोलकाता तक फैली हुई है। इतने बड़े स्तर पर छापेमारी से साफ है कि जांच का दायरा केवल किसी एक टोल प्लाजा या एक स्थान तक सीमित नहीं है।
जांच एजेंसी अलग-अलग परिसरों से दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने की कोशिश कर रही है।
अनधिकृत सॉफ्टवेयर से फर्जी रसीदों का आरोप
जांच में सामने आया है कि NHAI के अलग-अलग टोल प्लाजा पर कथित तौर पर अनधिकृत सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा था। आरोप है कि इन सॉफ्टवेयर के जरिए वास्तविक टोल रसीदों के बजाय फर्जी या अनधिकृत रसीदें तैयार की जाती थीं।
आरोपों के मुताबिक, इस प्रक्रिया के जरिए टोल से प्राप्त रकम का एक हिस्सा सरकारी खाते में दर्ज होने से पहले ही दूसरी जगह भेज दिया जाता था। अगर जांच में ये आरोप साबित होते हैं, तो यह सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ वित्तीय अनियमितता का गंभीर मामला हो सकता है।
फॉरेंसिक जांच में भी मिले संकेत
ED के अनुसार, फॉरेंसिक जांच और NHAI के रिकॉर्ड में भी ऐसे सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया और संबंधित ठिकानों पर तलाशी ली गई।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे, रकम कहां भेजी गई और कथित अवैध कमाई से किन लोगों को फायदा हुआ।
डिजिटल सबूतों पर भी ED की नजर
तलाशी अभियान का एक अहम उद्देश्य डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटाना है। टोल वसूली से जुड़े सॉफ्टवेयर, कंप्यूटर सिस्टम, लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
ED यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित तौर पर सरकारी रिकॉर्ड से बाहर रखी गई रकम को किस तरह और किन माध्यमों से आगे ट्रांसफर किया गया।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
यह पहली बार नहीं है जब ED ने फर्जी टोल वसूली से जुड़े मामले में कार्रवाई की है। पिछले महीने भी एजेंसी ने PMLA की धारा 17 के तहत सात राज्यों और क्षेत्रों में 14 ठिकानों पर तलाशी ली थी।
अब ताजा कार्रवाई के बाद जांच और तेज होने की उम्मीद है। आने वाले दिनों में बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हो सकता है कि कथित टोल घोटाले का नेटवर्क कितना बड़ा है और इससे कितनी रकम जुड़ी हुई है।





