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रीवा में मौत की फोरलेन: धंसती सड़क, फटती नालियां और KCC कंपनी का घटिया खेल ,करोड़ों का प्रोजेक्ट बना खतरे का गड्ढा!

रीवा। मध्यप्रदेश के रीवा जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बन रही फोरलेन सड़क अब विकास की नहीं बल्कि विनाश की तस्वीर पेश कर रही है। निर्माण एजेंसी KCC कंपनी की लापरवाही और घटिया निर्माण की परतें एक-एक कर खुलने लगी हैं। सड़क अभी पूरी तरह तैयार भी नहीं हुई है लेकिन कई स्थानों पर सड़क धंस रही है नालियां फट रही हैं और भारी वाहन तक गड्ढों में फंस रहे हैं। हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि यह सड़क अब आम जनता के लिए सीधे-सीधे मौत का रास्ता बनती जा रही है।

जमीनी हकीकत को बयां करती तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि सड़क किनारे बनाई गई नालियां कई जगह टूटकर धंस चुकी हैं। मिट्टी के नीचे से कमजोर निर्माण की पोल खुल रही है। एक जगह तो भारी ट्रक तक सड़क में धंस गया जिससे साफ संकेत मिलता है कि निर्माण की गुणवत्ता किस स्तर की है। यह स्थिति तब है जब प्रोजेक्ट अभी अधूरा है और पूरा निर्माण होना बाकी है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि KCC कंपनी ने शुरू से ही मानकों को ताक पर रखकर काम किया। नालियों के निर्माण में लोहे की सरीया की जगह प्लास्टिक की सरीया का इस्तेमाल किया गया जिसका ग्रामीणों ने पहले दिन से विरोध किया था। बावजूद इसके लगभग 19 किलोमीटर लंबी नालियां इसी घटिया सामग्री से तैयार कर दी गईं। लोगों का कहना है कि यह प्रयोग नहीं बल्कि जनता की जान के साथ खिलवाड़ है।

इतना ही नहीं निर्माण के दौरान जरूरी प्रक्रियाओं को भी पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। नालियों और सड़क की ढलाई के बाद पानी का छिड़काव (क्योरिंग) नहीं किया गया जिससे सीमेंट की मजबूती विकसित ही नहीं हो पाई। वहीं वाटर कंपेक्टर जैसी जरूरी मशीनों का इस्तेमाल भी कहीं दिखाई नहीं दिया। बिना मजबूत बेस तैयार किए ही सीधे निर्माण कर दिया गया जिससे अब सड़क और नालियां तेजी से टूटने लगी हैं।

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निर्माण में हल्की गुणवत्ता की सीमेंट धूलयुक्त सामग्री और बिना वाइब्रेटर के ढलाई का उपयोग किया गया। बताया जा रहा है कि लगभग 70 प्रतिशत सड़क का निर्माण इसी तरह जल्दबाजी में पूरा कर लिया गया। अब जैसे-जैसे समय बीत रहा है वैसे-वैसे इस विकास की सच्चाई सामने आ रही है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे निर्माण कार्य की निगरानी जिस सरकारी एजेंसी को करनी थी वह पूरी तरह नदारद नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में निरीक्षण दिखाकर एसी कमरों में बैठे रहे जबकि जमीनी स्तर पर घटिया निर्माण का खुला खेल चलता रहा। अगर समय पर सख्ती बरती जाती तो आज यह सड़क हादसों का गढ़ न बनती।

इस पूरे मामले को लेकर अब जनता में भारी आक्रोश है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी अगर सड़क सुरक्षित नहीं है तो इस विकास का क्या मतलब? कई लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि अगर पैसा बचाना ही था तो सड़क बनाने की जरूरत क्या थी लोग खुद रास्ता निकाल लेते।

फिलहाल हालात यह हैं कि यह फोरलेन सड़क पूरी होने से पहले ही अपनी विश्वसनीयता खो चुकी है। लोग अब इस मामले में उच्चस्तरीय जांच गुणवत्ता परीक्षण और दोषी अधिकारियों व कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। रीवा में विकास के नाम पर चल रहा यह  खेल अब उजागर हो चुका है अब देखना यह होगा कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाता है।

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