भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ

भोपाल। अयोध्या नगर स्थित महर्षि विद्या मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। सात दिवसीय इस आध्यात्मिक आयोजन के प्रथम दिवस पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को अत्यंत दिव्य और सफल बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ सायंकाल भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ, जिसमें सैकड़ों पीत वस्त्र धारी महिलाओं ने सिर पर मंगल कलश धारण कर क्षेत्र का भ्रमण किया। पूरे मार्ग में भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए आगे बढ़ते नजर आए।
व्यास पीठ पर विराजमान प्रख्यात कथावाचक आचार्य डॉ निलिम्प त्रिपाठी जी ने विधिवत पूजन एवं आरती के साथ कथा का श्रीगणेश किया। अपने प्रवचन में उन्होंने श्रीमद् भागवत पुराण के महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि यह ग्रंथ साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का शब्दमय स्वरूप है। इसके श्रवण मात्र से जीव को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है तथा जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
प्रथम दिवस की कथा में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य के प्रसंग को अत्यंत रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। आचार्य जी ने नारद मोह तथा भक्ति देवी के दुख का वर्णन करते हुए बताया कि कलयुग के प्रभाव से ज्ञान और वैराग्य जर्जर एवं अचेत हो गए थे, जिन्हें श्रीमद् भागवत के श्रवण से पुनः नवजीवन प्राप्त हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि जिस घर में भागवत का वाचन और श्रवण होता है, वहाँ दरिद्रता और क्लेश का वास नहीं होता।
इस आयोजन का संचालन ब्रह्मचारी डॉ गिरीश जी के मार्गदर्शन में हो रहा है। विद्यालय के प्राचार्य श्री अशोक डेहरिया सहित समस्त स्टाफ और विद्यार्थियों का सहयोग उल्लेखनीय रहा। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पंडाल खचाखच भरा रहा। भजनों की मधुर धुनों पर भक्तगण भावविभोर होकर झूमते नजर आए।
कार्यक्रम के अंत में महाआरती का आयोजन किया गया तथा उपस्थित श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। यह कथा प्रतिदिन सायं 5 बजे से 7 बजे तक आयोजित की जा रही है।
द्वितीय दिवस की कथा में शुकदेव जी का आगमन, राजा परीक्षित प्रसंग एवं सृष्टि वर्णन पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा।





