मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा पर यूरेनियम डील का श्रेय, कांग्रेस ने भाजपा को घेरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान भारत-ऑस्ट्रेलिया यूरेनियम सहयोग को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी इस समझौते को प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की बड़ी उपलब्धि बता रही है, जबकि कांग्रेस ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि भारत को यूरेनियम बेचने की मंजूरी की प्रक्रिया वर्ष 2011 में ही शुरू हो चुकी थी। कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला यूपीए सरकार के समय हुई कूटनीतिक पहल का परिणाम था।
जयराम रमेश ने 2011 के फैसले का दिया हवाला
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भाजपा के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 4 दिसंबर 2011 को तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने अपनी लेबर पार्टी से भारत को यूरेनियम निर्यात की मंजूरी हासिल की थी। उन्होंने कहा कि यह फैसला 2008 के भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद संभव हुआ था। जयराम रमेश ने 2011 की मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा के नेताओं और समर्थकों को तथ्यों के आधार पर बयान देना चाहिए, न कि इतिहास को बदलने की कोशिश करनी चाहिए।
The BJP ecosystem is on an overdrive to show that Australia’s uranium sales to India are a Modi breakthrough.
On Dec 4 2011, Australian Prime Minister Julia Gillard got approval of her party to sell uranium to India following the India-US Nuclear Agreement of Oct 2008.
The BJP… pic.twitter.com/sHem7KpKXZ
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) July 10, 2026
अमित मालवीय ने मोदी सरकार को दिया श्रेय
इससे पहले भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा था कि वर्ष 2010 में ऑस्ट्रेलिया ने भारत द्वारा परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर न करने के कारण यूरेनियम बेचने से इनकार कर दिया था। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच यूरेनियम निर्यात समझौता संभव हुआ, जो वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारी का प्रमाण है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज
यूरेनियम समझौते को लेकर अब कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा सरकार पूर्ववर्ती सरकारों की उपलब्धियों का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा इसे मोदी सरकार की सफल विदेश नीति और भारत की मजबूत वैश्विक स्थिति का परिणाम बता रही है। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।





