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रीवा रेंज में खुला तस्करी राज ! गोविंदगढ़ पुलिस की नाकामी उजागर, शहडोल में कुएं से मिली 3 लाशों ने खोली परतें

रीवा। रीवा रेंज में लंबे समय से फल-फूल रहे गांजा तस्करी के नेटवर्क का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शहडोल में एक हादसे के बाद कुएं से तीन तस्करों के शव मिलने से पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं। यह घटना न केवल एक आपराधिक अंत की कहानी है बल्कि रीवा रेंज में खुलेआम चल रहे तस्करी के खेल और पुलिस की नाकामी की पोल भी खोलती है।

जानकारी के अनुसार देर रात गश्ती के दौरान पुलिस को एक संदिग्ध वाहन दुर्घटनाग्रस्त हालत में मिला जिसमें भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। वाहन में सवार लोग मौके से फरार हो गए थे, जिससे मामला संदिग्ध बन गया। लेकिन अगली सुबह घटनाक्रम ने सनसनीखेज मोड़ ले लिया जब एक किसान कन्हैया लाल यादव ने अपने खेत में बने कुएं में तीन शव तैरते देख पुलिस को सूचना दी।

मौके पर पहुंची पुलिस ने गोताखोरों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और कुएं से एक-एक कर तीन लाशें बाहर निकालीं। मृतकों की पहचान बुढार निवासी कुख्यात तस्कर रोहित शर्मा शहडोल निवासी तनुज शुक्ला और सचिन सिंह बघेल के रूप में हुई। शुरुआती जांच में साफ हुआ कि तीनों गांजा तस्करी के सक्रिय सदस्य थे और हादसे के वक्त भी बड़ी खेप के साथ सफर कर रहे थे।

पुलिस के मुताबिक गश्ती वाहन को देखकर तस्करों ने तेज रफ्तार में भागने की कोशिश की जिससे वाहन पलट गया। घायल होने के बावजूद वे अंधेरे में खेतों की ओर भागे लेकिन घबराहट में कुएं में गिर गए और बाहर नहीं निकल सके। इसी वजह से तीनों की मौत हो गई।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि रोहित शर्मा जैसा कुख्यात तस्कर जो लंबे समय से गोविंदगढ़ क्षेत्र में सक्रिय था, आखिरकार रीवा पुलिस की पकड़ से बाहर कैसे रहा? स्थानीय लोगों के मुताबिक वह खुलेआम तस्करी करता था और उसे किसी का डर नहीं था। इससे साफ संकेत मिलता है कि गोविंदगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पूरी तरह विफल रही।

इतना ही नहीं यह मामला केवल एक थाना या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। चर्चा है कि पूरे रीवा रेंज में तस्करी का नेटवर्क बिना किसी रोक-टोक के संचालित हो रहा था। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सब स्थानीय स्तर पर लापरवाही का नतीजा है या फिर कहीं न कहीं सिस्टम की मिलीभगत भी इसमें शामिल है?

जहां एक ओर शहडोल पुलिस की सतर्कता के चलते यह मामला सामने आया वहीं दूसरी ओर रीवा रेंज के अधिकारियों की भूमिका पर उंगली उठना स्वाभाविक है। अगर समय रहते कार्रवाई होती तो शायद यह तस्कर पहले ही गिरफ्त में होता और इस तरह की घटना सामने नहीं आती।

इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी उजागर कर दिया है कि नशे का अवैध कारोबार किस तरह युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। गांव-शहर हर जगह इसका असर दिखाई दे रहा है लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।

फिलहाल पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और जांच जारी है लेकिन यह घटना रीवा रेंज की कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान छोड़ गई है। अब देखना होगा कि क्या इस सनसनीखेज खुलासे के बाद सिस्टम जागेगा या फिर तस्करी का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।

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