सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा बड़ा मुद्दा, PG से हॉस्टल तक व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली में रहने वाले छात्रों की उस चिंता को सामने ला दिया है, जो लंबे समय से कॉलेज की पढ़ाई और करियर की दौड़ के पीछे दब गई थी। अब जर्जर PG, सुरक्षित आवास और पुलिस की जवाबदेही जैसे सवाल DUSU चुनाव से लेकर हाई कोर्ट तक पहुंच चुके हैं।
हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा बनी बड़ा सवाल
दिल्ली में पढ़ाई के लिए आने वाले हजारों छात्रों के सामने अब सिर्फ कॉलेज और करियर की चिंता नहीं है। सत्य निकेतन में निजी PG की इमारत गिरने की घटना के बाद सुरक्षित आवास का सवाल भी केंद्र में आ गया है।
सत्य निकेतन से सटे मोची गांव की संकरी गलियां और पुरानी इमारतें इस समस्या की गंभीरता दिखाती हैं। इलाके में बड़ी संख्या में PG और गेस्ट हाउस होने की बात सामने आई है, जहां हजारों छात्र रहते हैं। कई इमारतों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
दोपहर में भी गलियों में अंधेरा
इलाके में रहने वाले छात्र वंदन कोठारी ने आसपास की स्थिति दिखाई। हादसे वाली जगह से करीब 100 कदम दूर एक संकरी गली में दोपहर के समय भी पर्याप्त रोशनी नहीं थी। रास्ता इतना संकरा था कि दो लोगों का साथ निकलना मुश्किल नजर आया।
वंदन के मुताबिक, वह खुद इलाके के एक PG में रहते हैं और आसपास की कई इमारतों की हालत ठीक नहीं है। उनका कहना है कि दिन में ज्यादातर छात्र कॉलेज या नौकरी के लिए बाहर रहते हैं, इसलिए उस समय गलियां अपेक्षाकृत खाली दिखाई देती हैं।
अब छात्रों से सीधे संवाद करेगी पुलिस
सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता के बीच उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर दिल्ली पुलिस ने विशेष पहल शुरू की है। SHO और ACP छात्रों से सीधे बातचीत करेंगे और PG, किराए के मकानों तथा दूसरे छात्र बहुल इलाकों की समस्याओं की जानकारी लेंगे।
पुलिस अपराध, उत्पीड़न, महिला सुरक्षा, स्थानीय विवाद और आवास से जुड़ी परेशानियों को समझकर जरूरी कार्रवाई करेगी। जिन मामलों में MCD या अन्य एजेंसियों की जरूरत होगी, वहां संबंधित विभागों से समन्वय किया जाएगा।
20 सितंबर तक देनी होगी रिपोर्ट
इस अभियान को केवल औपचारिक बैठक तक सीमित नहीं रखने के निर्देश दिए गए हैं। छात्रों से बातचीत के बाद पुलिस अधिकारियों को की गई कार्रवाई की एक्शन टेकन रिपोर्ट 20 सितंबर तक जमा करनी होगी।
पुलिस का उद्देश्य छात्रों के साथ भरोसे का रिश्ता मजबूत करना और उन्हें यह भरोसा दिलाना है कि किसी समस्या की स्थिति में स्थानीय पुलिस तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।
DUSU चुनाव के बीच बढ़ी राजनीतिक सक्रियता
इसी बीच दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव की सरगर्मी भी तेज हो गई है। 18 सितंबर को होने वाले चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया 10 सितंबर को पूरी होनी है। सत्य निकेतन हादसा अब छात्र संगठनों के लिए भी अहम मुद्दा बन गया है।
NSUI ने नॉर्थ कैंपस में मार्च निकाला, जबकि ABVP ने PG में रहने वाले छात्रों से संपर्क अभियान शुरू किया। AAP की छात्र इकाई ASAP ने हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए प्रार्थना सभा और भजन का आयोजन किया।
हॉस्टल का मुद्दा पहुंचा हाई कोर्ट
सुरक्षित और किफायती छात्र आवास की कमी का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ की ओर से दायर जनहित याचिका में विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या के मुकाबले हॉस्टल की उपलब्धता पर सवाल उठाए गए हैं।
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय की स्थापना को 104 साल से अधिक हो चुके हैं, लेकिन छात्रों की बढ़ती संख्या के अनुपात में आवासीय ढांचा विकसित नहीं हुआ। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और DU से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
अब सवाल सिर्फ चुनावी वादे का नहीं
सत्य निकेतन हादसे ने एक ऐसी समस्या को सामने ला दिया है, जिसका असर हजारों छात्रों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। सुरक्षित PG, पर्याप्त हॉस्टल और जर्जर इमारतों की निगरानी अब सिर्फ चुनावी भाषणों के मुद्दे नहीं रह सकते।
छात्र संगठनों की सक्रियता और पुलिस की नई पहल के बीच असली परीक्षा यह होगी कि इन कदमों का जमीन पर कितना असर दिखाई देता है। आखिर सुरक्षित छत किसी छात्र के लिए सुविधा नहीं, बल्कि पढ़ाई और जिंदगी दोनों की बुनियादी जरूरत है।





