लद्दाख की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर केंद्र से बातचीत बेनतीजा, प्रतिनिधियों ने जताई निराशा

लद्दाख के राजनीतिक भविष्य और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। करीब चार महीने बाद हुई बातचीत में लिखित ड्राफ्ट नहीं मिलने से प्रतिनिधिमंडल निराश है। अब अक्टूबर में कारगिल में अगली बैठक पर उम्मीदें टिकी हैं।
चार महीने बाद बैठक, लेकिन नहीं मिला ड्राफ्ट
गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) तथा कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) की सब-कमेटी के बीच हुई बैठक में लद्दाख की प्रस्तावित लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, पिछली बैठक 22 मई को हुई थी और उम्मीद थी कि इस बार सरकार पहले की चर्चाओं के आधार पर कोई लिखित प्रस्ताव सामने रखेगी।
हालांकि, ऐसा नहीं हुआ। लद्दाख के एक्टिविस्ट और LAB से जुड़े सोनम वांगचुक ने बैठक के बाद इसे निराशाजनक बताया।
सवालों की सूची मिली, समाधान नहीं
वांगचुक के अनुसार, बैठक में प्रतिनिधिमंडल को कई सवालों की सूची दी गई और बताया गया कि इन पर अगली बैठक में चर्चा होगी। उनका कहना है कि विधानसभा, सीधे परिसीमन और चुनाव जैसे मुद्दों पर पहले भी बातचीत हो चुकी है।
ऐसे में प्रतिनिधिमंडल को इस बैठक से ठोस प्रगति की उम्मीद थी। लेकिन लिखित ड्राफ्ट नहीं मिलने से उनकी चिंता बरकरार है।
अक्टूबर में कारगिल में अगली बैठक
बैठक के दौरान अक्टूबर के पहले सप्ताह में कारगिल में अगली बातचीत आयोजित करने का प्रस्ताव सामने आया है। प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद है कि तब केंद्र सरकार प्रस्तावित लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर अधिक स्पष्टता के साथ आगे आएगी।
वांगचुक की मुख्य मांग जल्द से जल्द लद्दाख में लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई विधानसभा स्थापित करने की है। उनका कहना है कि इसके लिए प्रस्ताव आगामी शीतकालीन सत्र में संसद के सामने रखा जाना चाहिए।
मुआवजे पर बनी सहमति
बैठक में एक सकारात्मक पहल की बात भी सामने आई। वांगचुक के मुताबिक, 24 सितंबर 2025 की घटनाओं में मारे गए और घायल हुए लोगों के लिए मुआवजे को मंजूरी मिलने की जानकारी अधिकारियों ने दी है। जल्द ही इसकी घोषणा होने की उम्मीद है।
हालांकि, आंदोलन से जुड़े लोगों पर दर्ज मामलों को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। प्रतिनिधिमंडल सभी मामलों को एक साथ वापस लेने की मांग कर रहा है, जबकि चरणबद्ध वापसी के प्रस्ताव पर उसने सहमति नहीं जताई।
बड़े फैसलों पर रोक की मांग
LAB और KDA ने मांग रखी है कि जब तक चुनी हुई लोकतांत्रिक संस्था नहीं बन जाती, तब तक लद्दाख के स्वरूप या प्रशासनिक स्थिति को प्रभावित करने वाले बड़े फैसले न लिए जाएं।
भूमि हस्तांतरण, प्रशासनिक ढांचे या क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर असर डालने वाले स्थायी निर्णयों को रोकने की मांग लिखित रूप में सरकार के सामने रखी गई है।
आंदोलन नहीं चाहते, लेकिन विकल्प खुला
वांगचुक ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल फिलहाल आंदोलन नहीं चाहता और बातचीत से समाधान की उम्मीद कर रहा है। लेकिन यदि लद्दाख की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन का रास्ता खुल सकता है।
उनका दावा है कि प्रस्ताव शीतकालीन सत्र में आने के बाद चुनाव और अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रक्रिया शुरू हो तो करीब एक साल में विधानसभा का गठन संभव है। अब अक्टूबर की बैठक यह तय करने में अहम होगी कि बातचीत आगे बढ़ती है या फिर असंतोष दोबारा सड़कों पर दिखाई देता है।





