जवा तहसील में नामांतरण फीडिंग घोटाले के आरोप! किसान त्रस्त, राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे बड़े सवाल। ढाई महीने से लटका नामांतरण, रिश्वत नहीं तो काम नहीं? जवा तहसील पर भ्रष्टाचार और मनमानी के गंभीर आरोप

रीवा। जवा तहसील में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। नामांतरण फीडिंग में देरी और कथित रिश्वतखोरी के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। तहसील कार्यालय सर्किल अतरैला अंतर्गत तेदुनी हल्का के किसान लक्ष्मी सिंह ने जिला कलेक्टर से गुहार लगाते हुए आरोप लगाया है कि 02 मार्च 2026 को नायब तहसीलदार द्वारा नामांतरण आदेश जारी होने के बावजूद आज तक ऑनलाइन फीडिंग नहीं की गई, जिससे उन्हें लगातार तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
किसान का आरोप है कि संबंधित पटवारी और तहसील स्तर के कर्मचारियों की लापरवाही एवं कथित लेन-देन के कारण जानबूझकर फाइल लंबित रखी गई। बताया गया कि प्रतिवादी पक्ष द्वारा फीडिंग रोकने के लिए आवेदन दिए जाने के बाद अस्थायी रोक लगाई गई थी लेकिन 02 अप्रैल 2026 को एसडीएम न्यायालय से स्टे समाप्त होने के बाद भी आदेश का पालन नहीं किया गया। किसान का कहना है कि कई बार फोन और संदेश के माध्यम से संपर्क करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने आरोप लगाया कि जवा तहसील के अतरैला और डभौरा सर्किल में सीमांकन, नामांतरण, खसरा सुधार, खतौनी, फार्मर आईडी और अन्य राजस्व कार्य महीनों तक लटकाए जाते हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना सुविधा शुल्क के कोई भी फाइल आगे नहीं बढ़ती। लोगों का कहना है कि छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी किसानों और आम नागरिकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
सूत्रों के मुताबिक तहसील में पदस्थ सहायक ई-गवर्नेंस ऑपरेटर पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करने नामांतरण फीडिंग, बंटवारा और रिकॉर्ड सुधार जैसे कार्यों में जानबूझकर देरी कर लोगों पर दबाव बनाया जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि जो व्यक्ति पैसे देने से इंकार करता है उसकी फाइल महीनों तक लंबित रख दी जाती है। इतना ही नहीं विरोध करने वालों को खुलेआम यह कहकर धमकाया जाता है कि जो करना है कर लो यहां वही होगा जो हम चाहेंगे।
कुछ शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने वालों के राजस्व रिकॉर्ड में तकनीकी आपत्तियां लगाकर परेशान किया जाता है। किसी का नाम खसरे से हटाने गलत फीडिंग करने या दस्तावेजों में त्रुटियां डालकर मानसिक दबाव बनाने जैसे आरोप सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल भ्रष्टाचार ही नहीं बल्कि सरकारी रिकॉर्ड के दुरुपयोग का भी बड़ा मामला माना जाएगा।
स्थानीय लोगों ने एसडीएम कार्यालय की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि एसडीएम समय पर कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते जिससे अधीनस्थ अधिकारी और कर्मचारी भी मनमानी करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब अधिकारी समय से कार्यालय में नहीं बैठेंगे तो आम जनता को न्याय कैसे मिलेगा।
अब नवागत जिला कलेक्टर नरेंद्र सिंह सूर्यवंशी से लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं। किसानों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल जवा तहसील का यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि प्रशासन भ्रष्टाचार और लापरवाही के इन आरोपों पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है।






