हाईवे पर खुलेआम नशा! नादन में अवैध शराब का अड्डा किसके संरक्षण में चल रहा खेल?

मैहर। मैहर जिले के नादन देहात थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-30 किनारे जरियारी मोड़ के पास कथित रूप से संचालित हो रही अवैध शराब दुकान ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां अस्थायी टिन शेड और कच्चे ढांचे के भीतर खुलेआम शराब की बिक्री की जा रही है मानो यह कोई अधिकृत दुकान हो।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि क्षेत्र में लागू आबकारी नियमों के अनुसार इस स्थान पर किसी लाइसेंसधारी दुकान की अनुमति नहीं बताई जा रही है। इसके बावजूद दिनदहाड़े और देर रात तक चल रही बिक्री यह संकेत देती है कि कहीं न कहीं निगरानी में भारी चूक या फिर मिलीभगत की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस तथाकथित दुकान पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। शाम होते-होते यहां शराबियों की भीड़ लग जाती है जिससे हाईवे पर अव्यवस्था और असुरक्षा का माहौल बन जाता है। कई बार नशे में धुत लोगों के बीच विवाद और झगड़े की स्थिति बनती है जिससे राहगीरों और स्थानीय निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हाईवे पर इस तरह की गतिविधियां दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं। नशे में वाहन चलाने की घटनाएं बढ़ने का खतरा बना हुआ है जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। इसके अलावा सड़क किनारे इस प्रकार की दुकानें ट्रैफिक जाम और अव्यवस्थित पार्किंग की समस्या भी पैदा कर रही हैं।
मामले का एक गंभीर पहलू राजस्व हानि से भी जुड़ा हुआ है। बिना लाइसेंस शराब बिक्री से सरकार को मिलने वाला टैक्स सीधे प्रभावित होता है जिससे सरकारी खजाने को नुकसान होता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या संबंधित विभाग इस नुकसान से अनजान है या फिर अनदेखी कर रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया यहां रोज शराब बिकती है सबको पता है लेकिन कार्रवाई नहीं होती। इससे लगता है कि कहीं न कहीं संरक्षण मिल रहा है।
वहीं नादन थाना पुलिस और आबकारी विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट और विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन की यह चुप्पी पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस प्रकार के अवैध कारोबार पर सख्ती से रोक नहीं लगाई गई तो यह संगठित अपराध का रूप ले सकता है जिससे क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की जाए और हाईवे किनारे सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।
अब बड़ा सवाल यही है क्या प्रशासन इस कथित अवैध शराब अड्डे पर शिकंजा कसेगा या फिर हाईवे किनारे नशे का यह खेल यूं ही बेखौफ चलता रहेगा?





