
मैहर प्रतिनिधि। रीवा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) गौरव राजपूत द्वारा चलाए जा रहे नशा मुक्त समाज अभियान के बीच मैहर जिले की जमीनी हकीकत अब सवालों के घेरे में है। धार्मिक नगरी के रूप में पहचान रखने वाला यह जिला इन दिनों अवैध शराब कारोबार को लेकर चर्चाओं में है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है जिनमें कथित तौर पर खुलेआम शराब बिक्री के दृश्य सामने आने की बात कही जा रही है।
बताया जा रहा है कि ये वीडियो अमरपाटन, अमदरा और मैहर देहात थाना क्षेत्रों से जुड़े हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है लेकिन इनकी मौजूदगी ने पुलिस और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार अब केवल शहर तक सीमित नहीं रहा बल्कि गांव-गांव और गली-गली तक फैल चुका है।
ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर खुलेआम शराब की बिक्री हो रही है जिससे सामाजिक माहौल भी प्रभावित हो रहा है। युवाओं के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का आरोप है कि पुलिस समय-समय पर कार्रवाई जरूर करती है लेकिन वह केवल सतही स्तर तक सीमित रहती है। छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई कर मामले को समाप्त मान लिया जाता है जबकि असली सप्लायर और नेटवर्क संचालक तक पहुंचने की कोशिश नहीं की जाती।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब भी किसी मामले में शराब जब्त होती है तो प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि शराब कहां से आई किसकी थी और किन रास्तों से सप्लाई हो रही थी। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी बल्कि अवैध नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने में भी मदद मिलेगी।
जानकारों का मानना है कि जब तक कार्रवाई सप्लाई चेन के मूल स्रोत तक नहीं पहुंचेगी तब तक यह समस्या खत्म नहीं हो सकती। हर बार जब्ती और गिरफ्तारी की खबरें सामने आती हैं लेकिन कुछ ही दिनों में हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। इससे यह साफ होता है कि समस्या का स्थायी समाधान अभी दूर है।
इधर इस पूरे मामले पर अब तक किसी वरिष्ठ अधिकारी की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे लोगों में असंतोष और अविश्वास की भावना बढ़ती जा रही है। जनता यह जानना चाहती है कि आखिरकार नशा मुक्ति अभियान का वास्तविक असर जमीन पर कब दिखाई देगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या मैहर पुलिस IG की मुहिम को सख्ती से लागू कर पाएगी या फिर वायरल वीडियो ही सिस्टम की हकीकत उजागर करते रहेंगे? आने वाले समय में प्रशासन की कार्रवाई इस दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।





