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रीवा में ट्रैफिक ब्लास्ट! रतहरा-चोरहटा के बीच बीहर नदी पुल बंद सड़कें टूटीं, शहर जाम में कैद

रीवा। मध्यप्रदेश के रीवा जिले में रतहरा से चोरहटा के बीच स्थित बीहर नदी का पुराना पुल बंद होने के बाद हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। पुल में आई दरार और एक तरफ करीब 3 से 4 इंच तक धंसने के कारण इसे बंद किया गया था लेकिन एक महीने बीत जाने के बाद भी मरम्मत कार्य पूरा नहीं हो सका है। इसका सीधा असर पूरे शहर की यातायात व्यवस्था पर पड़ा है।

रतहरा-चोरहटा मार्ग जो शहर का एक प्रमुख कनेक्टिंग कॉरिडोर माना जाता है अब ट्रैफिक ब्लैक जोन में तब्दील हो चुका है। पुल बंद होने के बाद सारा ट्रैफिक वैकल्पिक सड़कों पर डायवर्ट कर दिया गया है जिससे इन मार्गों पर दबाव कई गुना बढ़ गया है। नतीजा जहां पहले यातायात सामान्य रहता था वहां अब दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।

स्थिति और भी गंभीर तब हो जाती है जब इन वैकल्पिक सड़कों की हालत खुद ही खराब होने लगती है। महज एक महीने के भीतर शहर की कई मुख्य सड़कें दरकने लगी हैं। जगह जगह गड्ढे उखड़ती परत और लंबी दरारें यह बता रही हैं कि सड़कें इतने भारी ट्रैफिक के दबाव को झेलने के लिए तैयार नहीं थीं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल बंद होने के बाद से उनकी दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है। जहां पहले 10-15 मिनट का सफर होता था अब वही दूरी तय करने में 40-50 मिनट लग रहे हैं। स्कूली बच्चे देर से पहुंच रहे हैं कर्मचारी समय पर दफ्तर नहीं पहुंच पा रहे और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि खराब सड़कों और लगातार बढ़ते ट्रैफिक के कारण हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग बेहद खतरनाक बन चुका है। कई स्थानों पर छोटे-छोटे हादसे भी सामने आ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नजर नहीं आ रहा।

इधर बिहार नदी के पुल की मरम्मत कार्य की रफ्तार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। मौके पर न पर्याप्त मजदूर दिखाई देते हैं और न ही मशीनों का प्रभावी उपयोग हो रहा है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि मरम्मत कार्य में और देरी हो सकती है।

लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत तेज गति से की जाती तो शहर को इस तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही कदम उठाए जाएंगे या फिर जनता को जल्द राहत देने के लिए पुल का कार्य तेजी से पूरा किया जाएगा?

फिलहाल रतहरा से चोरहटा के बीच की स्थिति यही संकेत दे रही है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है।

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