
मीडिया ऑडीटर विशेष पड़ताल | रीवा जिले में डीजल वितरण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवालों का बाजार गर्म है। ताजा सामने आई तस्वीरों में एक टैंकरनुमा वाहन जियो पेट्रोल पंप पर डीजल भरवाते हुए दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यह वाहन सड़क निर्माण कार्य में लगी KCC कंपनी से जुड़ा हुआ है। तस्वीरों के सामने आने के बाद अब यह बहस तेज हो गई है कि आखिर जब शासन ने डीजल की बिक्री पर सीमा निर्धारित कर रखी है तो बड़े पैमाने पर ईंधन आपूर्ति किस नियम के तहत की जा रही है।
गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव और संभावित ईंधन संकट को देखते हुए सरकार ने पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए हैं। इसी क्रम में खुदरा पेट्रोल पंपों से डीजल बिक्री पर प्रति वाहन 200 लीटर तक की सीमा निर्धारित किए जाने की बात सामने आई थी ताकि आम जनता किसानों और आवश्यक सेवाओं को पर्याप्त मात्रा में ईंधन मिलता रहे तथा कालाबाजारी और जमाखोरी पर रोक लगाई जा सके।
लेकिन रीवा में सामने आई तस्वीरें कई सवाल खड़े कर रही हैं। तस्वीरों में स्पष्ट रूप से एक टैंकर वाहन पेट्रोल पंप पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जबकि दूसरी तस्वीर में उसी वाहन को ईंधन भरते हुए देखा जा सकता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रतहरा से चोरहटा तक सड़क निर्माण कर रही KCC कंपनी के वाहनों और टैंकरों को लगातार ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है जबकि कई बार आम वाहन चालकों को सीमित मात्रा या स्टॉक की कमी का हवाला दिया जाता है।
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि शासन का उद्देश्य ईंधन संकट की स्थिति में आम जनता को राहत देना है, तो फिर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि नियम सभी पर समान रूप से लागू हों। लोगों का सवाल है कि यदि एक वाहन को 200 लीटर तक ही डीजल दिए जाने की व्यवस्था है तो टैंकरों में होने वाली आपूर्ति की निगरानी कौन कर रहा है और उसका रिकॉर्ड किस विभाग के पास है।
मामले को लेकर एक और चर्चा यह भी है कि कमर्शियल सप्लाई की तुलना में सार्वजनिक पेट्रोल पंपों पर डीजल की दर अपेक्षाकृत कम पड़ती है। ऐसे में निर्माण कंपनियों द्वारा सार्वजनिक पंपों से बड़े पैमाने पर ईंधन लेने की स्थिति में आम उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ सकता है। यही वजह है कि स्थानीय लोग पूरे मामले की जांच की मांग कर रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जियो पेट्रोल पंप पर कई बार कंपनी के वाहनों को प्राथमिकता के आधार पर ईंधन उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन सामने आई तस्वीरों ने प्रशासनिक निगरानी पर प्रश्नचिह्न अवश्य लगा दिए हैं।
अब लोगों ने जिला प्रशासन, खाद्य विभाग परिवहन विभाग और पेट्रोलियम कंपनियों के अधिकारियों से मांग की है कि तस्वीरों की सत्यता टैंकर में भरे गए ईंधन की मात्रा उसके उपयोग और वितरण व्यवस्था की जांच कराई जाए। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हो रहा है तो स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि कहीं अनियमितता है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
रीवा में सामने आई ये तस्वीरें फिलहाल एक बड़ा सवाल छोड़ रही हैं क्या 200 लीटर की सीमा सिर्फ आम जनता के लिए है, या फिर नियमों का पालन सभी पर समान रूप से हो रहा है?
**— मीडिया ऑडीटर**
**Tag / SEO URL:**





