
रीवा। रीवा रेंज में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे पुलिस के बहुचर्चित नशे से दूरी है जरूरी अभियान को उस समय बड़ा झटका लगा जब आईजी कार्यालय से चंद कदम दूर स्थित अमहिया थाने में पुलिस लाइन का एक प्रधान आरक्षक कथित रूप से नशे की हालत में पहुंचकर हाईवोल्टेज ड्रामा करने लगा। हैरानी की बात यह रही कि जिस विभाग को नशे के खिलाफ समाज को जागरूक करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है उसी विभाग का कर्मचारी खुलेआम नशे में धुत होकर अपनी हनक दिखाता नजर आया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रधान आरक्षक ने खुद को पुलिस लाइन का गुंडा बताते हुए जमकर रौब झाड़ा। इतना ही नहीं उसने यह भी कहा कि वह सूबेदार दिलीप तिवारी का अंगरक्षक है और पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के कार्यकाल में उनका सहायक रह चुका है। नशे में चूर प्रधान आरक्षक ने कथित तौर पर यह तक कह डाला कि उसने एक पउआ सफेद वाली और एक पउआ मैकडॉवेल पी रखी है। उसके बयान और हरकतें देखकर थाने में मौजूद लोग हैरान रह गए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि रीवा रेंज में आईजी डीआईजी और जिले में एसपी जैसे बड़े अधिकारी मौजूद हैं फिर भी पुलिस विभाग के भीतर अनुशासन का यह हाल क्यों है? वह भी तब जब पूरा घटनाक्रम आईजी कार्यालय से कुछ ही दूरी पर घटित हुआ। वीडियो बनते रहे लोग तमाशा देखते रहे और पुलिस व्यवस्था सवालों के घेरे में खड़ी हो गई।
इस घटना ने एक बार फिर शहर में चर्चा छेड़ दी है कि आखिर नशा मुक्ति अभियान का वास्तविक असर कहां दिखाई दे रहा है। मंचों से नशे के खिलाफ भाषण और रैलियां निकालने वाली पुलिस के सामने अब लोग सवाल खड़े कर रहे हैं कि जब विभाग के भीतर ही नशे की ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं तो आम जनता को क्या संदेश जाएगा।
उधर शहर के कवाड़ी मोहल्ला सहित कई इलाकों में अवैध शराब और नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर लंबे समय से शिकायतें उठती रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के दावों के बावजूद नशे का कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा। ऐसे में पुलिस कर्मी का नशे में धुत होकर थाने पहुंचना विभागीय कार्यप्रणाली पर और भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
शहर में अब एक ही चर्चा है कि आईजी के नशा मुक्ति अभियान को सबसे बड़ा झटका किसी अपराधी ने नहीं बल्कि पुलिस लाइन के अपने ही एक प्रधान आरक्षक ने दिया है। यह घटनाक्रम उन दावों पर भी सवालिया निशान लगा रहा है जिनमें पुलिस खुद को नशे के खिलाफ सबसे बड़ी मुहिम का अगुआ बताती है।
अब लोगों की निगाहें रीवा रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या इस मामले में सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी विभागीय फाइलों में दबकर रह जाएगा? फिलहाल अमहिया थाने का यह घटनाक्रम पुलिस महकमे के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुका है और नशा मुक्ति अभियान की चमक पर बड़ा धब्बा बनकर उभर रहा है।






