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जमीन में समाती नालियां, खुल गई विकास की पोल! करोड़ों का प्रोजेक्ट या मिट्टी में मिलती योजना?

जिले में रतहरा से चोरहटा तक बन रही 4-लेन सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं सैकड़ों करोड़ रुपये की लागत से चल रहे सड़क एवं ड्रेनेज निर्माण कार्य की जमीनी हकीकत अब चौंकाने वाली तस्वीरों के साथ सामने आ रही है। ताजा मामले मे सामने आई एक तस्वीर ने पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीर में साफ देखा जा सकता है कि बनाई गई नाली पूरी तरह धंस चुकी है कंक्रीट का ढांचा टूटकर बिखर गया है और अंदर की मिट्टी बाहर आ गई है। सरिया तक नजर आ रहा है जो यह दर्शाता है कि निर्माण कार्य कितनी लापरवाही से किया गया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक यह कोई एक जगह की समस्या नहीं है बल्कि कई स्थानों पर इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। कहीं नालियां बनते ही दरारों से भर गईं, तो कहीं पैदल चलने भर से जमीन धंसने लगी। लोगों का कहना है कि कंपनी द्वारा निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की जा रही है और घटिया सामग्री का उपयोग खुलेआम हो रहा है।

तस्वीर बनी सबूत, दावों की खुली पोल
अब तक जो शिकायतें सिर्फ शब्दों तक सीमित थीं वे अब तस्वीरों के रूप में सामने आकर सच्चाई बयान कर रही हैं। फोटो में नाली की दीवारें टूटकर गिर चुकी हैं और नीचे का बेस कमजोर नजर आ रहा है। ऐसा प्रतीत होता है कि न तो सही तरीके से कंक्रीट डाला गया और न ही मिट्टी को ठीक से दबाया गया जिसके कारण पूरी संरचना धराशायी हो गई। यह तस्वीर उन दावों को भी कटघरे में खड़ा करती है जिनमें कहा जा रहा था कि निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ किया जा रहा है। जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।

जनता की बढ़ती नाराजगी
इस तरह की लापरवाही से क्षेत्रीय जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अगर कुछ ही दिनों में नालियां धंसने लगें, तो यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार और लापरवाही का संकेत है। कई स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि शिकायत करने के बावजूद न तो कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं और न ही प्रशासन की ओर से कोई सख्त कदम उठाया जा रहा है।

हादसे का बढ़ता खतरा
धंसी हुई नालियां और टूटी संरचनाएं अब आम लोगों के लिए खतरा बनती जा रही हैं। राहगीरों और वाहन चालकों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। खासकर रात के समय या बारिश के दौरान ऐसे स्थानों पर दुर्घटना की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कई बार छोटे-मोटे हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया।

मॉनिटरिंग सिस्टम पर उठे सवाल
इतने बड़े बजट के प्रोजेक्ट में इस स्तर की खामियां सामने आना मॉनिटरिंग सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। सवाल यह उठता है कि क्या निर्माण कार्य की नियमित जांच नहीं हो रही? क्या इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ कागजों में निरीक्षण कर रहे हैं? या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?

लोगो का मानना है कि यदि निर्माण कार्य में सही तकनीक और गुणवत्ता का पालन किया जाता तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। यह साफ संकेत है कि कहीं न कहीं प्रक्रिया में बड़ी चूक हुई है।

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