11 पेटी का खुलासा या सिस्टम की नाकामी? अमरपाटन में जनता बनी पहरेदार, तस्करी के खेल पर उठे बड़े सवाल

मैहर। मैहर जिले के अमरपाटन थाना क्षेत्र में अवैध शराब तस्करी का मामला इन दिनों सुर्खियों के केंद्र में है। ताजा घटनाक्रम में 11 पेटी शराब की बरामदगी ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। लेकिन इस पूरे मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शराब की इस खेप को पकड़ने का श्रेय पुलिस को नहीं बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को दिया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि जब आम जनता ही तस्करी के खिलाफ मोर्चा संभाल रही है तो जिम्मेदार सिस्टम आखिर कर क्या रहा है?
मिली जानकारी और क्षेत्र में वायरल हो रही खबरों के अनुसार ग्रामीणों ने संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखते हुए खुद कार्रवाई की और शराब से भरी खेप को पकड़ लिया। इसके बाद इसे अमरपाटन पुलिस के सुपुर्द किया गया। पुलिस ने औपचारिक कार्रवाई करते हुए शराब जब्त कर ली लेकिन इसके बाद की जांच अब तक सवालों के घेरे में है।
सबसे अहम सवाल यह है कि यह शराब आखिर कहां से आई? इसका असली मालिक कौन है? इसे किस नेटवर्क के तहत कहां पहुंचाया जा रहा था? और क्या इस पूरे खेल में कोई बड़ा सिंडिकेट शामिल है? इन सवालों के जवाब अब तक सामने नहीं आ पाए हैं जिससे लोगों के बीच संदेह और गहरा होता जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के जरिए वैध शराब दुकानों से माल उठाकर ग्रामीण इलाकों में खपाया जा रहा है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह मामला केवल तस्करी का नहीं बल्कि एक सुनियोजित और व्यवस्थित सप्लाई चेन का संकेत देता है। हालांकि प्रशासन की ओर से इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है लेकिन बार-बार सामने आ रही घटनाएं इस संभावना को बल देती हैं।
घटना के बाद क्षेत्रीय जनता में आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है। लोगों का कहना है कि हर बार छोटी कार्रवाई कर मामले को दबा दिया जाता है लेकिन असली गुनहगारों तक पहुंचने की कोशिश नहीं होती। ग्रामीणों का सीधा सवाल है क्या केवल 11 पेटी पकड़कर सिस्टम अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है? या फिर इस कार्रवाई के पीछे छिपे बड़े खेल को उजागर करने की भी कोई मंशा है?
जानकारों की मानें तो अवैध शराब तस्करी का नेटवर्क बेहद जटिल और संगठित होता है जिसमें सप्लाई ट्रांसपोर्ट और वितरण की पूरी श्रृंखला शामिल होती है। ऐसे में केवल निचले स्तर पर कार्रवाई करने से इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। जब तक इस नेटवर्क के स्रोत और इसके संचालकों पर सीधी चोट नहीं की जाएगी तब तक हर बरामदगी सिर्फ एक औपचारिक कार्रवाई बनकर रह जाएगी।
इस पूरे मामले में पुलिस की चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। अब तक कोई विस्तृत प्रेस नोट या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है जिससे अटकलों का दौर और तेज हो गया है। लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या यह एक अलग घटना है या फिर जिले में सक्रिय किसी बड़े तस्करी गिरोह का हिस्सा?
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या नशा मुक्त अभियान केवल कागजों और पोस्टरों तक सीमित रह गया है? अगर जमीनी हकीकत यही है कि जनता खुद तस्करी पकड़ रही है, तो फिर सरकारी तंत्र की सक्रियता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या अमरपाटन पुलिस इस 11 पेटी के मामले को गंभीरता से लेते हुए तस्करी के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाएगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाएगा?





