जवा तहसील में रिश्वत का डिजिटल खेल ? बिना पैसे आदेश नहीं विरोध पर धमकी के आरोप से मचा बवाल,ई-गवर्नेंस ऑपरेटर पर खसरा फीडिंग में गड़बड़ी और वसूली के गंभीर आरोप नए कलेक्टर की सख्ती पर टिकी जनता की उम्मीद

रीवा जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए नए कलेक्टर लगातार सख्ती दिखा रहे हैं लेकिन जवा तहसील से सामने आए आरोपों ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जवा तहसील में पदस्थ सहायक ई-गवर्नेंस ऑपरेटर राहुल गुप्ता पर गंभीर आरोप लगे हैं कि बिना पैसे लिए कोई भी काम नहीं किया जाता। आरोपों के अनुसार ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट करने से लेकर तहसीलदार और नायब तहसीलदार के आदेशों तक को कथित रूप से लेन-देन के बिना आगे नहीं बढ़ाया जाता।
सूत्रों और स्थानीय लोगों का कहना है कि तहसील में आने वाले आम नागरिकों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी परेशान होना पड़ता है। नामांतरण, बंटवारा, खसरा सुधार, रिकॉर्ड अपलोडिंग और अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाओं में देरी कर लोगों पर दबाव बनाया जाता है। आरोप है कि जब तक सुविधा शुल्क नहीं दिया जाता तब तक फाइलें लंबित रखी जाती हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब कोई व्यक्ति पैसे देने से मना करता है या विरोध करता है तो उसे खुलेआम धमकाया जाता है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि संबंधित कर्मचारी द्वारा कहा जाता है कि जाओ जो करना है कर लो, यहां वही होगा जो मैं चाहूंगा। इतना ही नहीं पटवारियों पर भी प्रभाव होने का दावा कर लोगों को डराया जाता है। इन बातों ने आम नागरिकों में भय और नाराजगी दोनों पैदा कर दी है।
मामले को और गंभीर तब माना जा रहा है जब कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि शिकायत करने वालों के खिलाफ राजस्व रिकॉर्ड में गलत फीडिंग कर दी जाती है। किसी का नाम खसरे से हटाने, रिकॉर्ड में गड़बड़ी करने या दस्तावेजों में तकनीकी आपत्तियां लगाकर परेशान करने जैसे आरोप भी सामने आए हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल भ्रष्टाचार बल्कि सरकारी रिकॉर्ड के दुरुपयोग का भी गंभीर मामला माना जाएगा।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तहसील जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय में यदि आम जनता को न्याय और सुविधा के बजाय दबाव और कथित वसूली का सामना करना पड़ेगा तो सरकार की पारदर्शी प्रशासन व्यवस्था की मंशा पर सवाल उठेंगे। लोगों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य काम को आसान और पारदर्शी बनाना था लेकिन यहां ऑनलाइन सिस्टम ही कथित वसूली का माध्यम बनता दिखाई दे रहा है।
जवा क्षेत्र के कई लोगों ने रीवा कलेक्टर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि शिकायतें सही साबित होती हैं तो संबंधित कर्मचारियों पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए ताकि आम जनता का विश्वास प्रशासन पर बना रहे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या रीवा के नए कलेक्टर जवा तहसील में लगे इन गंभीर आरोपों को लेकर सख्त कदम उठाएंगे या फिर आम जनता इसी तरह कथित भ्रष्टाचार और दबाव के बीच परेशान होती रहेगी। पूरे मामले ने तहसील प्रशासन में हलचल पैदा कर दी है और क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।





