कैमरा देखते ही बदल गया सिस्टम!मीडिया के सामने रोकी गईं दो बाहरी यात्री बसें, सवाल उठते ही बिना कार्रवाई छोड़ने का आरोप रीवा में RTO जांच के नाम पर चल रहे खेल पर बड़ा खुलासा

रीवा जिले में परिवहन विभाग की कथित मनमानी और वसूली व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। रायपुर हाईवे पर उस समय सनसनी फैल गई जब खुद को परिवहन विभाग से जुड़ा बताने वाले लोगों ने दो बाहरी यात्री बसों को रोककर जांच शुरू कर दी। लेकिन मामला तब पूरी तरह संदिग्ध हो गया जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची और सवाल-जवाब शुरू होते ही दोनों बसों को बिना किसी वैधानिक कार्रवाई के छोड़ दिया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हाईवे पर चल रही इस कार्रवाई में न तो पूरी तरह अधिकृत टीम दिखाई दी और न ही प्रक्रिया में पारदर्शिता नजर आई। मौके पर मौजूद कुछ लोग निजी कपड़ों में वाहनों को रुकवाते दिखाई दिए जबकि एक व्यक्ति को लेकर दावा किया गया कि वह व्यपमं भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा पूर्व आरक्षक है जिसे बाद में सेवा से निष्कासित किया जा चुका है। इसके बावजूद उसका मौके पर सक्रिय दिखाई देना पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
मीडिया टीम जब मौके पर पहुंची तो वहां पहले से दो बाहरी यात्री बसें खड़ी थीं। बस चालकों से दस्तावेजों की जांच और कथित कार्रवाई की बात कही जा रही थी। लेकिन जैसे ही कैमरे चालू हुए और मीडिया कर्मियों ने कार्रवाई का आधार पूछना शुरू किया माहौल अचानक बदल गया। कुछ लोग कैमरे से बचते नजर आए तो कुछ ने खुद को विभागीय कर्मचारी बताने की कोशिश की।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन बसों को रोककर जांच की जा रही थी उन्हें बाद में बिना चालान और बिना किसी लिखित कार्रवाई के रवाना कर दिया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि बसों में नियमों का उल्लंघन था तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि कोई कमी नहीं थी तो उन्हें रोका ही क्यों गया?
स्थानीय लोगों और वाहन संचालकों का आरोप है कि हाईवे पर इस प्रकार की जांच लंबे समय से विवादों में रही है। आरोप हैं कि कई बार वाहन चालकों पर दबाव बनाकर मौके पर ही रकम वसूली जाती है और मामला खत्म कर दिया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन मीडिया के सामने हुई इस घटना ने संदेह को और गहरा कर दिया है।
सूत्रों का कहना है कि परिवहन विभाग की कुछ कार्रवाइयों में बाहरी और निजी लोगों की भूमिका लगातार बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि अब विभागीय कार्यप्रणाली पर उंगलियां उठने लगी हैं। नियमों के मुताबिक सड़क पर वाहन जांच और कार्रवाई अधिकृत अधिकारियों की मौजूदगी में तय प्रक्रिया के तहत की जानी चाहिए लेकिन रायपुर हाईवे पर जो तस्वीर सामने आई उसने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है कि आखिर एक निष्कासित पूर्व आरक्षक और निजी लोगों की मौजूदगी में किसके आदेश पर वाहन जांच कराई जा रही थी। क्या विभाग को इसकी जानकारी थी या फिर पूरा खेल संरक्षण में चल रहा था? यह सवाल अब प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं।
फिलहाल मीडिया के कैमरे में कैद हुई यह पूरी घटना रीवा जिले में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल छोड़ गई है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाते हैं या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।





