
मैहर। धार्मिक नगरी मैहर इन दिनों एक नए विवाद को लेकर सुर्खियों में है। एक ओर मध्यप्रदेश सरकार धार्मिक स्थलों और आस्था केंद्रों के आसपास शराबबंदी लागू करने के दावे कर रही है वहीं दूसरी ओर मैहर जिले में नई शराब दुकानों के संचालन की खबरों ने पूरे प्रशासनिक सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सामने आते ही स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है और अब सरकार की कथनी और करनी पर बहस तेज हो गई है।
जानकारी के मुताबिक मैहर के प्रतिबंधित क्षेत्र से महज एक-दो किलोमीटर दूरी पर पोड़ी गांव में हाईवे किनारे भाठिया ग्रुप की नई शराब दुकान संचालित होने की चर्चा जोरों पर है। इतना ही नहीं जरियारी मोड़ के पास भी नई शराब दुकान खुलने की बात कही जा रही है। इन खबरों ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 की नई आबकारी नीति में स्पष्ट रूप से नई शराब दुकानें नहीं खोलने के निर्देश जारी किए थे तो आखिर मैहर जिले में ये दुकानें कैसे शुरू हो गईं? क्या आबकारी विभाग ने अनुमति दी या फिर प्रशासनिक संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि धार्मिक नगरी होने के बावजूद मैहर में खुलेआम शराब की पैकारी हो रही है। गांव-गांव तक शराब पहुंचाने के लिए पैकार सक्रिय हैं और प्रतिबंधित क्षेत्र के आसपास भी शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है। लोगों का कहना है कि मां शारदा की नगरी की पहचान अब धीरे-धीरे नशे के कारोबार से जुड़ती जा रही है जो बेहद चिंता का विषय है।
मामले को लेकर पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। आमजन पूछ रहे हैं कि क्या स्थानीय पुलिस और थाना प्रभारियों को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है? यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? लोगों के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि कहीं न कहीं सिस्टम की चुप्पी इस पूरे कारोबार को संरक्षण तो नहीं दे रही।
रीवा रेंज के आईजी लगातार नशे पर प्रहार अभियान चला रहे हैं। नशे के कारोबार में संलिप्त पुलिसकर्मियों और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई कर उन्हें पुलिस लाइन भेजा जा रहा है। इसके बावजूद मैहर जिले में शराब कारोबार का फैलना कई सवाल खड़े कर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जिले में नई शराब दुकानें खुल रही हैं और खुलेआम पैकारी हो रही है, तो यह बिना स्थानीय स्तर की मिलीभगत के संभव नहीं हो सकता।
सूत्रों की मानें तो हाईवे किनारे संचालित होने वाली इन दुकानों के जरिए आसपास के ग्रामीण इलाकों तक शराब सप्लाई की जा रही है। इससे युवाओं में नशे की लत बढ़ने का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। धार्मिक वातावरण और सामाजिक व्यवस्था पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
अब जनता जिला कलेक्टर पुलिस अधीक्षक और आबकारी विभाग से जवाब मांग रही है। लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि नई शराब दुकानें नियमों के खिलाफ संचालित हो रही हैं तो संचालकों के साथ-साथ संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई हो।
फिलहाल मैहर में शराब दुकानों को लेकर छिड़ा यह विवाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार अपने शराबबंदी के दावों पर कितनी गंभीर है और धार्मिक नगरी मैहर को नशे के बढ़ते कारोबार से बचाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।





