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रामनगर में रेत माफियाओं का आतंक! जंगल छलनी, महुआ के पेड़ काटे गए, प्रशासन पर संरक्षण के आरोप

मैहर। रामनगर क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। जनपद पंचायत वार्ड क्रमांक 15 के सदस्य राजेन्द्र सिंह उर्फ मुन्ना ने रामनगर थाना प्रभारी को शिकायत पत्र सौंपकर क्षेत्र में सक्रिय कथित रेत माफियाओं के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में वन संपदा की बर्बादी, अवैध वसूली, धमकियों और प्रशासनिक संरक्षण जैसे कई सनसनीखेज मुद्दे उठाए गए हैं जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।

शिकायत के अनुसार वन परिक्षेत्र सोनघड़ियाल अंतर्गत ग्राम कुबरी और सरिया के आसपास करीब 246 एकड़ वन भूमि में लंबे समय से अवैध रेत उत्खनन किया जा रहा है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में संजय सिंह और अरुण सिंह उर्फ राजू सिंह की भूमिका सामने आ रही है। बताया गया कि क्षेत्र में प्रतिदिन दर्जनों ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनें सक्रिय रहती हैं जो जंगल के भीतर पहुंचकर रेत निकालने का काम कर रही हैं।

ग्रामीणों और शिकायतकर्ता का आरोप है कि इस कथित अवैध कारोबार में ट्रैक्टर चालकों से प्रति ट्रॉली 800 रुपये तक वसूले जाते हैं। रेत के इस खेल ने जंगलों की प्राकृतिक संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। आरोप है कि उत्खनन के दौरान बड़ी संख्या में महुआ के पेड़ों को काट दिया गया जिन्हें बाद में बेच भी दिया गया। महुआ के पेड़ आदिवासी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं ऐसे में इनके कटने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन जंगलों की सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन और वन विभाग पर है वही अब कथित रेत माफियाओं के कब्जे में दिखाई दे रहे हैं। कई ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विरोध करने वालों को धमकियां दी जाती हैं जिसके कारण लोग खुलकर सामने आने से डर रहे हैं।

शिकायत पत्र में कई गंभीर घटनाओं का भी जिक्र किया गया है। आरोप लगाया गया कि अवैध उत्खनन से जुड़े मामलों में पहले भी हिंसक घटनाएं हो चुकी हैं। एक पटवारी की कथित तौर पर ट्रैक्टर से कुचलकर मौत हो चुकी है जबकि एक ड्राइवर की खदान धंसने से जान चली गई थी। इतना ही नहीं नायब तहसीलदार पर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश किए जाने का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है। इन घटनाओं ने प्रशासनिक अमले के साथ-साथ आम लोगों में भी भय का माहौल पैदा कर दिया है।

जनपद सदस्य राजेन्द्र सिंह ने आरोप लगाया कि पहले भी प्रशासन द्वारा नोटिस और छापेमारी जैसी कार्रवाई की गई लेकिन उसका कोई असर दिखाई नहीं दिया। उनका कहना है कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई होती तो जंगलों की यह स्थिति नहीं बनती। उन्होंने प्रशासन पर संरक्षण देने के आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार शिकायतों के बावजूद अवैध उत्खनन रुक नहीं रहा जिससे लोगों में यह धारणा मजबूत हो रही है कि पूरा नेटवर्क किसी न किसी संरक्षण में संचालित हो रहा है।

शिकायतकर्ता ने निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर वन विभाग अधिनियम सहित अन्य गंभीर धाराओं में कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास वीडियो, दस्तावेज और मशीनों से जुड़े कई प्रमाण मौजूद हैं जिन्हें जांच एजेंसियों को सौंपा जा सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर जंगलों को छलनी करने वाले इन कथित रेत माफियाओं पर प्रशासन कब शिकंजा कसेगा? क्या इस बार भी कार्रवाई केवल नोटिस और जांच तक सीमित रहेगी या फिर वन संपदा को बचाने के लिए कोई बड़ा कदम उठाया जाएगा।

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