
रीवा जिले की राजनीति इन दिनों एक अनोखी चर्चा के केंद्र में आ गई है। आमतौर पर विकास कार्यों सड़क, बिजली, पानी और जनसमस्याओं को लेकर सुर्खियों में रहने वाली राजनीति अब सोहाग गीत और मंचीय प्रस्तुतियों को लेकर चर्चा में है। जिले के विधायक नरेंद्र प्रजापति का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वे मुख्यमंत्री कन्या विवाह कार्यक्रम के मंच पर पारंपरिक सोहाग गीत गाते नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आते ही क्षेत्र में राजनीतिक बहस शुरू हो गई है और अब लोग तंज कसते हुए कहने लगे हैं कि यदि विधायक जी का मन गायकी में ज्यादा है तो उन्हें राजनीति छोड़ संगीत की दुनिया में कदम रख लेना चाहिए ताकि क्षेत्र की जनता विकास के लिए कोई नया जनप्रतिनिधि चुन सके।
बताया जा रहा है कि हाल ही में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान विधायक नरेंद्र प्रजापति ने मंच संभाला और पारंपरिक लोक शैली में सोहाग गीत गाना शुरू किया। शुरुआत में वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया लेकिन जैसे ही वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पहुंचा, प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने विधायक के इस अंदाज को मनोरंजक बताया जबकि दूसरी ओर विरोधियों और स्थानीय नागरिकों के एक वर्ग ने इसे जनप्रतिनिधि की प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए गंभीर सवाल खड़े कर दिए। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में आज भी कई मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। गांवों में सड़कें खराब हैं कई जगह पेयजल संकट बना हुआ है युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। ऐसे में जनता को उम्मीद थी कि उनका जनप्रतिनिधि इन मुद्दों पर सक्रिय दिखाई देगा लेकिन विधायक मंचों पर गीत गाते नजर आ रहे हैं।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की टिप्पणियां सामने आने लगीं। किसी ने लिखा अब विधायक नहीं गायक बन गए हैं। वहीं कुछ लोगों ने तंज कसते हुए कहा विधानसभा से ज्यादा रुचि अब सांस्कृतिक मंचों में दिखाई दे रही है। कई लोगों ने यह भी लिखा कि यदि विधायक जनता की समस्याओं को लेकर इतनी ही सक्रियता दिखाएं जितनी मंच पर दिखाई दे रही है तो क्षेत्र का विकास तेजी से हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेताओं का सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेना नई बात नहीं है। भारतीय राजनीति में कई नेता सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी भागीदारी निभाते रहे हैं। लेकिन जब जनता क्षेत्रीय समस्याओं को लेकर नाराज हो और विकास कार्यों की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हों, तब इस प्रकार की तस्वीरें विरोधियों को हमला करने का मौका दे देती हैं।
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि विधानसभा क्षेत्र में कई विकास कार्य अधूरे पड़े हुए हैं। कुछ गांवों में अब भी खराब सड़कें लोगों की परेशानी बनी हुई हैं। किसान सिंचाई और बिजली की समस्याओं से जूझ रहे हैं। युवाओं के सामने रोजगार का संकट है। ऐसे में जनता चाहती है कि उनका विधायक इन मुद्दों को लेकर ज्यादा गंभीरता से काम करे न कि केवल मंचीय कार्यक्रमों में व्यस्त दिखाई दे।
हालांकि विधायक समर्थकों की राय इससे अलग है। उनका कहना है कि किसी सामाजिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेना गलत नहीं है। समर्थकों का तर्क है कि सोहाग गीत भारतीय लोक संस्कृति का हिस्सा हैं और विधायक ने केवल सामाजिक माहौल को बेहतर बनाने और लोगों से जुड़ाव दिखाने का प्रयास किया है। उनका कहना है कि विपक्ष बिना वजह इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने में लगा हुआ है।
इसके बावजूद अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं? क्या जनता अपने नेता से मनोरंजन चाहती है या विकास? यही सवाल अब गांव की चौपालों से लेकर सोशल मीडिया तक गूंजने लगा है।
फिलहाल मुख्यमंत्री कन्या विवाह कार्यक्रम में विधायक नरेंद्र प्रजापति द्वारा गाया गया सोहाग गीत रीवा जिले की राजनीति में नई बहस छेड़ चुका है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कितना राजनीतिक असर डालता है और जनता इसे किस नजर से देखती है इस पर सभी की नजर बनी हुई है।





