गंगेव में पदस्थ, जवा में वर्षों से जमे बाबू पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप! एक ही कर्मचारी संभाल रहा कई शाखाएं, जनता ने कलेक्टर से की कार्रवाई की मांग

रीवा। रीवा जिले के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में इन दिनों कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले की जनपद पंचायत जवा में एक कर्मचारी को कई महत्वपूर्ण शाखाओं की जिम्मेदारी दिए जाने और उसकी मूल पदस्थापना कहीं और होने के बावजूद वर्षों से जवा में बनाए रखने को लेकर अब आम जनता खुलकर विरोध करने लगी है। मामला गंगेव जनपद पंचायत में पदस्थ कर्मचारी ऋषभ तिवारी से जुड़ा बताया जा रहा है जिन पर आरोप है कि वे मुख्य कार्यपालन अधिकारी के संरक्षण में जवा जनपद में कई विभागों का संचालन कर रहे हैं और बिना पैसे कोई काम नहीं होने दिया जाता।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ऋषभ तिवारी की मूल पदस्थापना जनपद पंचायत गंगेव में है लेकिन वे लंबे समय से जनपद पंचायत जवा में पदस्थ होकर स्थापना शाखा, जन्म-मृत्यु शाखा, शिकायत शाखा, मनरेगा और अकाउंट से जुड़े कार्य देख रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक ही कर्मचारी को कई विभागों की जिम्मेदारी सौंपे जाने से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो रही है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जवा जनपद में कोई भी कार्य बिना लेन-देन के नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति पैसा देने में असमर्थ हो या देने से मना कर दे तो उसके काम को महीनों तक लंबित रखा जाता है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कार्यालय में आम लोगों को लगातार चक्कर लगवाए जाते हैं और फाइलें जानबूझकर रोकी जाती हैं। इससे पंचायत प्रतिनिधि, सचिव, रोजगार सहायक और ग्रामीण सभी परेशान हैं।
लोगों का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी की नियुक्ति गंगेव जनपद में हुई है तो उसे जवा जनपद में वर्षों तक क्यों रखा गया है। यह भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जवा जनपद में अन्य कर्मचारियों पर भरोसा क्यों नहीं किया जा रहा और एक ही बाबू को इतनी शाखाओं का प्रभार क्यों दिया गया। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि जवा जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुलभ सिंह पुसाम हर महत्वपूर्ण काम में उक्त कर्मचारी की सलाह लेते हैं और बिना उसकी सहमति कोई निर्णय नहीं लिया जाता।
जनपद क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों का कहना है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है। कई अधिकारी और कर्मचारी मुख्यालय में निवास नहीं करते और बाहर से आवागमन करते हैं जिससे कार्यालयीन व्यवस्था प्रभावित होती है। वहीं ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद भी समय पर जांच और कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि कोई जिम्मेदार अधिकारी पारदर्शिता और समय पर कार्यालय पहुंचने की बात करता है तो भ्रष्टाचार से जुड़े लोग विरोध प्रदर्शन और दबाव की राजनीति शुरू कर देते हैं। यही कारण है कि विभाग में सुधार की कोशिशें भी कमजोर पड़ जाती हैं।
ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने जिला कलेक्टर तथा जिला पंचायत सीईओ का ध्यान इस पूरे मामले की ओर आकर्षित कराया है। लोगों की मांग है कि गंगेव जनपद में पदस्थ कर्मचारी को तत्काल उसकी मूल पदस्थापना स्थल भेजा जाए और जवा जनपद में शाखाओं का कार्य विभाजन पारदर्शी तरीके से किया जाए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर भ्रष्टाचार के आरोपों की पड़ताल करने की मांग भी उठाई गई है।
जनता का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो पंचायत व्यवस्था में लोगों का भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। अब सबकी नजर जिला प्रशासन पर टिकी हुई है कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है और जनपद कार्यालय में चल रही कथित मनमानी तथा भ्रष्टाचार पर किस तरह अंकुश लगाया जाता है।





