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47 लाख की रहस्यमयी कार पर उठे सवाल क्या डीजीपी कराएंगे अमरपाटन की चर्चित नगदी कांड की जांच? पुलिस की चुप्पी, सोशल मीडिया की चर्चाएं और सियासी कनेक्शन ने बढ़ाया मामला

मैहर/अमरपाटन। अमरपाटन थाना क्षेत्र में वर्ष 2025 की एक कथित कार्रवाई अब फिर सुर्खियों में आ गई है। 31 अगस्त 2025 की रात लगभग 7 बजे से 10 बजे के बीच एक कार से भारी मात्रा में नगदी मिलने की खबर ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी। चर्चा रही कि वाहन से करीब 47 लाख 50 हजार रुपए बरामद किए गए थे लेकिन हैरानी की बात यह रही कि मामला थाने तक पहुंचने के बाद धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया। अब एक बार फिर इस कथित प्रकरण को लेकर सवाल उठने लगे हैं और पुलिस की भूमिका पर गंभीर चर्चाएं हो रही हैं।

सूत्रों के अनुसार उस रात अमरपाटन क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में एक कार को रोका गया था। बताया गया कि वाहन की जांच के दौरान भारी मात्रा में नगदी मिली जिसके बाद पुलिस महकमे में भी हलचल मच गई थी। हालांकि घटना को लेकर न तो कोई आधिकारिक प्रेस नोट जारी किया गया और न ही सार्वजनिक रूप से स्पष्ट जानकारी सामने आई। यही कारण है कि मामला अब रहस्य बनता जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी तेजी से फैली कि कथित रूप से बरामद रकम का संबंध रीवा जिले के सेमरिया क्षेत्र की राजनीति से जुड़ा हो सकता है। सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में सेमरिया विधायक अभय मिश्रा का नाम भी उछाला गया। हालांकि इस संबंध में किसी भी प्रकार की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। बावजूद इसके राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर लगातार जारी है।

सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि यदि वाहन से इतनी बड़ी रकम मिली थी तो आखिर पुलिस ने मामले का खुलासा सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं किया? आखिर वाहन में क्या था पैसा किसका था कहां से आया था और कहां ले जाया जा रहा था इन सवालों के जवाब आज तक सामने नहीं आ सके हैं।

पुलिस विभाग के भीतर के कुछ सूत्रों का दावा है कि कार से बड़ी रकम मिलने की सूचना सही थी लेकिन बाद में मामले को दबाने की कोशिश की गई। चर्चाएं यह भी हैं कि वाहन को कथित तौर पर क्लीन चिट देकर छोड़ दिया गया और वह रीवा की ओर रवाना हो गया। यदि मामला पूरी तरह वैध था तो फिर इतनी गोपनीयता क्यों बरती गई  यही सवाल अब जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

इस पूरे मामले में अमरपाटन एसडीओपी ख्याति मिश्रा की भूमिका को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किसके फोन या दबाव में इतनी बड़ी कार्रवाई पर पर्दा डाल दिया गया। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन पुलिस की चुप्पी ने संदेह को और गहरा कर दिया है।

अब लोगों की निगाहें मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय पर टिकी हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि क्या पुलिस महानिदेशक इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएंगे या फिर यह मामला हमेशा की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल, अमरपाटन की यह रहस्यमयी कार और कथित नगदी का मामला जनता के बीच बड़ा सवाल बन चुका है।

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