सीजेआई सूर्यकांत बोले समारोह में शामिल होने का सवाल नहीं, छात्रों के विरोध और बीसीआई कार्रवाई से गरमाया मामला

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने को लेकर विवाद गहरा गया है। छात्रों के विरोध और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के हस्तक्षेप के बाद अब सीजेआई ने साफ किया है कि उन्होंने समारोह में शामिल होने के निमंत्रण को स्वीकार ही नहीं किया था।
सीजेआई ने साफ किया अपना रुख
जोधपुर में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों को संबोधित करने के कुछ घंटों बाद सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि NALSAR के निमंत्रण पर उन्होंने कभी सहमति नहीं दी थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके दीक्षांत समारोह में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता। इससे समारोह को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया।
छात्रों ने किया था मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध
NALSAR में करीब 1,400 छात्र हैं, जिनमें से 400 से अधिक छात्रों ने सीजेआई को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था। छात्रों ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च और उससे जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान अदालत में की गई टिप्पणियों को अपने विरोध का आधार बनाया।
सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणी बनी वजह
छात्रों की नाराजगी उन मामलों से जुड़ी है, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस ज्यादती, पैलेट गन के इस्तेमाल और फेशियल रिकग्निशन तकनीक के जरिए प्रोफाइलिंग जैसे आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ इन मामलों की सुनवाई कर रही है।
22 जुलाई को एक वकील ने बिना औपचारिक याचिका दाखिल किए घटना का वीडियो दिखाने की मांग की थी। सीजेआई ने उनसे आरोपों को स्पष्ट करते हुए उचित याचिका दायर करने को कहा। इसी दौरान अदालत का समय बर्बाद न करने की टिप्पणी भी हुई, जिसे छात्रों ने गंभीरता से लिया।
BCI के पत्र से विवाद और बढ़ा
विवाद उस समय और बढ़ गया जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने NALSAR के कुलपति को पत्र भेजकर विरोध करने वाले छात्रों की पहचान और जांच की मांग की। पत्र में ऐसे छात्रों के वकील के रूप में पंजीकरण पर रोक की चेतावनी भी दी गई थी।
बाद में BCI ने वापस लिया आदेश
पत्र सामने आने के बाद व्यापक आलोचना हुई। इसके बाद BCI ने अपना सर्कुलर वापस ले लिया और अफसोस जताया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर जवाब मांगा और संकेत दिया कि बार काउंसिल को सीजेआई और विश्वविद्यालय के छात्रों के बीच ऐसे विवाद में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था।
मामला सिर्फ एक समारोह का नहीं
NALSAR का यह विवाद अब न्यायपालिका, छात्रों के असहमति जताने के अधिकार और कानूनी नियामक संस्थाओं की भूमिका से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर रहा है। दीक्षांत समारोह में कौन मुख्य अतिथि बनेगा, यह भले ही एक संस्थागत फैसला हो, लेकिन इस घटनाक्रम ने दिखाया है कि कानून के छात्रों की आवाज और न्यायपालिका के प्रति उनकी धारणा भी सार्वजनिक बहस का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।





