ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण देने की मांग पर उमर अब्दुल्ला का तंज, बोले- सीधे भारत रत्न देकर राष्ट्रपति बना दें

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण देने की बीजेपी नेता की मांग ने चुनाव आयोग और SIR को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच नया बयानबाजी का दौर शुरू कर दिया है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य की मांग पर तंज कसते हुए कहा कि पद्म भूषण से आगे बढ़कर उन्हें भारत रत्न दिया जाना चाहिए और राष्ट्रपति बना देना चाहिए।
समिक भट्टाचार्य ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि वह कम से कम पद्म भूषण सम्मान के हकदार हैं। उन्होंने कुमार के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कराने और मतदाता सूची से कथित अवैध बांग्लादेशी मतदाताओं को हटाने के काम का उल्लेख किया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्षी दल SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?
समिक भट्टाचार्य के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उमर अब्दुल्ला ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि पद्म भूषण की मांग पर ही क्यों रुकना चाहिए। उनके मुताबिक, ज्ञानेश कुमार को भारत रत्न दिया जाना चाहिए और उसके बाद राष्ट्रपति बना देना चाहिए।
उमर ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि पूरा विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची और SIR से संबंधित सवाल केवल राजनीतिक दलों की ओर से नहीं उठे, बल्कि मीडिया की जांच-पड़ताल के जरिए भी कुछ मुद्दे सामने आए हैं।
SIR विवाद के केंद्र में क्या है?
SIR यानी Special Intensive Revision के दौरान मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक विवाद चल रहा है। 23 सितंबर को सामने आई Indian Express की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने में कम से कम 14 मौकों पर चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट में इन आपत्तियों का संबंध नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता नाम हटाने और बहाल करने, Form 6 में बदलाव तथा चुनावी डेटा और IT सिस्टम के प्रबंधन से बताया गया था।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
इन रिपोर्टों के बाद चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि SIR समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए। आयोग ने आंतरिक पत्राचार में दर्ज आपत्तियों को निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बताया और रिपोर्टों में बताए गए मतभेदों को आयोग के कामकाज में बाधा के तौर पर स्वीकार नहीं किया।
इसके बाद 26 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की बैठक हुई, जिसमें मतदाता पंजीकरण, चुनावी डेटा तक पहुंच और IT सिस्टम की निगरानी से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टीकरण और फैसले सामने आए।
मतदाता सूची के सॉफ्टवेयर की भी होगी समीक्षा
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े अपने सॉफ्टवेयर की समीक्षा का भी आदेश दिया है। Reuters के मुताबिक, आयोग ने एक वरिष्ठ चुनाव अधिकारी और स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ वाली समिति के जरिए सॉफ्टवेयर की कानूनी और तकनीकी अनुपालन की जांच कराने की बात कही है।
आयोग ने यह कदम मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सामने आई शिकायतों और रिपोर्टों के बाद उठाया है। इससे यह संकेत मिलता है कि विवाद के बीच तकनीकी प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली और SIR की वैधता को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के लिए सहमति जताई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के बजाय एकतरफा तरीके से लिए गए। याचिकाकर्ता ने SIR प्रक्रिया को भी चुनौती दी है।
हालांकि, ये याचिका में लगाए गए आरोप हैं। अदालत ने अभी इन आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
विपक्ष और बीजेपी के बीच बयानबाजी तेज
SIR विवाद को लेकर विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, बीजेपी और उसके नेताओं ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया का बचाव किया है।
बीजेपी की ओर से यह तर्क भी सामने आया है कि यदि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो उन राज्यों के चुनाव परिणामों और प्रक्रियाओं को भी समान नजर से देखा जाना चाहिए जहां विपक्षी दलों को सफलता मिली। यह राजनीतिक पक्षों के बीच जारी बहस का हिस्सा है।
राजनीतिक तकरार के बीच असली मुद्दे
फिलहाल विवाद के तीन प्रमुख पहलू हैं—SIR के तहत मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया, चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की पद्धति और इन प्रक्रियाओं की तकनीकी निगरानी। एक तरफ विपक्ष आंतरिक आपत्तियों को गंभीर सवाल के रूप में उठा रहा है, वहीं आयोग का कहना है कि फैसले सहमति से लिए गए और आंतरिक विचार-विमर्श को विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
अब सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित सुनवाई और चुनाव आयोग की सॉफ्टवेयर समीक्षा से जुड़े निष्कर्ष इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण देने की बीजेपी नेता समिक भट्टाचार्य की मांग पर उमर अब्दुल्ला का व्यंग्यात्मक बयान SIR और चुनाव आयोग को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आया है। विवाद में एक ओर विपक्ष के सवाल और आंतरिक आपत्तियों की रिपोर्ट है, वहीं चुनाव आयोग सभी फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बता रहा है। अब न्यायिक प्रक्रिया और आयोग की तकनीकी समीक्षा पर नजर रहेगी।





