छुहिया घाटी में फिल्मी वारदात! ओडिशा पुलिस की कस्टडी से तस्कर आदित्य को छुड़ा ले गए बदमाश

पेशी के लिए ओडिशा से रीवा ला रही थी पुलिस, तीन वाहनों ने घेरा; मिर्ची-स्प्रे झोंकने और फायरिंग की भी सूचना, घटना ने पुलिस सुरक्षा पर खड़े किए सवाल
रीवा। रीवा-सीधी मार्ग की छुहिया घाटी में पुलिस कस्टडी से गांजा तस्करी के आरोपी आदित्य को कथित तौर पर उसके साथियों द्वारा छुड़ा ले जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि ओडिशा से पेशी के लिए आरोपी को सड़क मार्ग से रीवा लाया जा रहा था। इसी दौरान तीन वाहनों में पहुंचे बदमाशों ने पुलिस वाहन को घेर लिया और कथित रूप से मिर्ची पाउडर व स्प्रे का इस्तेमाल कर आरोपी को छुड़ाकर फरार हो गए। घटना के दौरान फायरिंग की सूचना भी सामने आई है हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
बताया जा रहा है कि आदित्य लंबे समय से रीवा, मऊगंज और नईगढ़ी क्षेत्र में सक्रिय था। मऊगंज सहित कई थानों में उसके खिलाफ मामले दर्ज होने की बात सामने आ रही है। इसके बावजूद लंबे समय तक पुलिस कार्रवाई की गति को लेकर सवाल उठते रहे। स्थानीय लोगों के अनुसार कार्रवाई में कथित सुस्ती का फायदा उठाकर आरोपी और उसका नेटवर्क लगातार सक्रिय बना रहा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आदित्य पुलिस रिकॉर्ड में लंबे समय से सक्रिय आरोपी था और उसके खिलाफ कई थानों में मामले दर्ज थे तो उसके नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी? क्या अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दर्ज मामलों को जोड़कर उसके पूरे नेटवर्क की जांच की गई थी? या फिर कार्रवाई केवल अलग-अलग मामलों तक सीमित रही?
आईजी की पिटारे वाली लिस्ट भी नहीं खोल पाई नेटवर्क की परतें?
पुलिस महकमे में लंबे समय से सक्रिय अपराधियों और तस्करों पर कार्रवाई को लेकर वरिष्ठ स्तर पर निर्देश दिए जाने की चर्चा होती रही है। इसके बावजूद आदित्य जैसे कथित सक्रिय तस्कर का नेटवर्क लगातार चलता रहा तो यह पुलिस की निगरानी और सूचना तंत्र पर सवाल खड़ा करता है। अब यह भी जांच का विषय है कि रीवा रेंज में सक्रिय तस्करी नेटवर्क की जानकारी पुलिस के पास कितनी थी और आदित्य के खिलाफ पहले से उपलब्ध सूचनाओं पर क्या कार्रवाई की गई।
थाना प्रभारियों की बैठक और उसी दौरान आदित्य का फरार होना
घटना के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि चुनावी तैयारियों के दौरान रीवा रेंज के स्तर पर सभी थाना प्रभारियों की बैठक बुलाई गई थी। इसी दौरान दूसरी ओर पुलिस कस्टडी में लाया जा रहा आदित्य छुहिया घाटी क्षेत्र में कथित तौर पर फरार हो गया। यह महज संयोग था या आरोपी के साथियों को पुलिस की गतिविधियों और उसके आने के रास्ते की पहले से जानकारी थी यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है। क्या पुलिस टीम के रूट की जानकारी किसी तरह आरोपियों तक पहुंची? क्या आरोपी के नेटवर्क ने पहले से रेकी की थी? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि एक तरफ सभी थाना प्रभारियों की बैठक चल रही थी और दूसरी तरफ आरोपी को छुड़ाने के लिए बदमाश तीन वाहनों में पहुंच गए। क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई कड़ी है या यह महज संयोग था इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
संरक्षण की चर्चाओं ने बढ़ाई चिंता
आदित्य को लेकर स्थानीय स्तर पर लंबे समय से एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की कथित संरक्षण भूमिका की चर्चाएं भी होती रही हैं। मऊगंज थाने सहित अन्य थाना क्षेत्रों में आरोपी को लेकर कथित दबाव बनाए जाने की बातें भी स्थानीय लोगों द्वारा कही जाती रही हैं।
यदि जांच में यह सामने आता है कि आरोपी के खिलाफ पहले से पर्याप्त मामले और सूचनाएं उपलब्ध थीं फिर भी उसके नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो इस पहलू की भी जांच जरूरी होगी कि आखिर उसे लगातार सक्रिय रहने का अवसर कैसे मिलता रहा।
अब सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं
आदित्य के फरार होने के बाद पुलिस के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर आरोपी और उसे छुड़ाने वाले बदमाशों को गिरफ्तार करना होगा वहीं दूसरी ओर यह भी पता लगाना होगा कि पूरी घटना की योजना कैसे बनी पुलिस के रूट की जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची और पुलिस कस्टडी में आरोपी की सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई। तीन वाहनों से पुलिस वाहन को घेरना मिर्ची-स्प्रे का कथित इस्तेमाल और फायरिंग की सूचना यदि जांच में सही साबित होती है तो यह सामान्य फरारी नहीं बल्कि पूर्व नियोजित कार्रवाई की ओर संकेत कर सकती है।







