ट्रंप ने किम जोंग उन को बताया दोस्त, ईरान और उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर समझाया अलग अमेरिकी रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन को अपना दोस्त बताते हुए ईरान और उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर अमेरिकी नीति के अंतर का बचाव किया है। 29 सितंबर को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप से पूछा गया कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने पर जोर देता है, जबकि उत्तर कोरिया पहले से परमाणु क्षमता रखता है। इस पर ट्रंप ने किम के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का हवाला दिया।
किम जोंग उन को बताया अपना दोस्त
ट्रंप ने कहा कि किम जोंग उन उनके दोस्त हैं और दोनों एक-दूसरे को पसंद करते हैं। उन्होंने अपने रिश्ते को उत्तर कोरिया के साथ अमेरिकी कूटनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। ट्रंप लंबे समय से किम के साथ व्यक्तिगत संपर्क को प्योंगयांग के साथ बातचीत का एक जरिया बताते रहे हैं।
ट्रंप ने यह भी कहा कि किम के पास काफी बड़ी परमाणु क्षमता है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता अमेरिका की क्षमता के बराबर नहीं है।
पिछली अमेरिकी सरकारों पर लगाया आरोप
उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम पर बात करते हुए ट्रंप ने पिछली अमेरिकी सरकारों को भी निशाने पर लिया। उनका तर्क था कि पहले के राष्ट्रपतियों ने प्योंगयांग के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए, जिसके कारण आज उत्तर कोरिया के पास परमाणु क्षमता मौजूद है।
ट्रंप ने अपने प्रशासन की नीति को पिछली सरकारों से अलग बताते हुए कहा कि उन्होंने उत्तर कोरिया के मामले में अलग तरीके से काम किया है। यह उनका राजनीतिक और नीतिगत आकलन है।
सिंगापुर और हनोई में हुई थी मुलाकात
ट्रंप और किम के बीच पहले कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकें हुई थीं। दोनों नेताओं की पहली ऐतिहासिक शिखर बैठक जून 2018 में सिंगापुर में हुई थी। इसके बाद फरवरी 2019 में वियतनाम के हनोई में दूसरी शिखर वार्ता हुई। दोनों देशों के बीच परमाणु निरस्त्रीकरण और प्रतिबंधों को लेकर कोई व्यापक समझौता नहीं हो सका था।
ट्रंप ने बाद में भी किम के साथ अपने व्यक्तिगत संपर्क को उत्तर कोरिया के मुद्दे पर बातचीत की संभावनाओं से जोड़ा है।
ईरान के लिए अमेरिका का अलग रुख
ईरान को लेकर ट्रंप प्रशासन का रुख स्पष्ट रूप से अधिक कठोर रहा है। व्हाइट हाउस ने बार-बार कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सितंबर में भी ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में कहा था कि वह ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे।
29 सितंबर को भी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तथा बातचीत की कोशिशें जारी रहीं। ट्रंप ने ईरान को लेकर किसी नए समझौते या प्रतिबंधों में राहत की पेशकश से इनकार किया। वहीं कतर मध्यस्थता के जरिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
उत्तर कोरिया और ईरान का मुद्दा क्यों अलग है?
ट्रंप की ताजा टिप्पणियों से यह स्पष्ट है कि उनका प्रशासन उत्तर कोरिया की मौजूदा परमाणु क्षमता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को एक समान स्थिति के रूप में नहीं देख रहा है। उत्तर कोरिया के मामले में ट्रंप अपने व्यक्तिगत संपर्क और पहले की कूटनीतिक बातचीत को प्रमुखता देते हैं, जबकि ईरान के मामले में अमेरिका परमाणु हथियार हासिल करने की किसी भी संभावना को रोकने पर जोर दे रहा है।
हालांकि, दोनों देशों के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर अमेरिकी नीति और उसके दीर्घकालिक परिणामों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। ट्रंप की ताजा टिप्पणी ने इस अंतर को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।





