आंध्र प्रदेश में 34 फीसदी BC आरक्षण रद्द, हाईकोर्ट ने छह सप्ताह में स्थानीय चुनाव शुरू करने को कहा

आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर चंद्रबाबू नायडू सरकार को बड़ा कानूनी झटका लगा है। हाईकोर्ट ने पिछड़ा वर्ग यानी BC के लिए 34 फीसदी आरक्षण से जुड़े दो सरकारी आदेश रद्द कर दिए। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया को छह सप्ताह के भीतर शुरू करने का निर्देश भी दिया है।
34 फीसदी BC आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने ग्रामीण स्थानीय निकायों में BC के लिए 34 फीसदी और शहरी निकायों में 33.33 फीसदी आरक्षण देने वाले राज्य सरकार के आदेशों को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था लागू करते समय सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय कानूनी सीमाओं और आवश्यक मानकों का पालन जरूरी है।
क्यों विवादों में आया था आरक्षण?
नायडू सरकार ने अगस्त 2026 में स्थानीय निकाय चुनावों में BC आरक्षण बढ़ाने का ऐलान किया था। सरकार ने इसे 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादे को पूरा करने वाला कदम बताया था। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने ग्रामीण निकायों में 34 फीसदी और शहरी निकायों में 33.33 फीसदी आरक्षण की घोषणा की थी।
सरकार ने किस आधार पर तय किया था कोटा?
हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने बताया था कि आरक्षण का आधार ‘यूनिफाइड फैमिली सर्वे’ से मिले BC आबादी के आंकड़े हैं। सरकार के मुताबिक इस सर्वे में BC समुदाय की आबादी करीब 50.42 फीसदी सामने आई थी। सरकार ने संख्या, भौगोलिक फैलाव और समुदायों की विविधता को भी आरक्षण तय करने के आधार के रूप में बताया था।
अदालत में 50 फीसदी सीमा का मुद्दा
आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं में यह सवाल उठाया गया था कि SC, ST और BC के आरक्षण को मिलाने पर कुल आरक्षण 50 फीसदी की सीमा से ऊपर जा सकता है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से 34 फीसदी BC कोटा तय करने के कानूनी और सांख्यिकीय आधार की जानकारी मांगी थी।
अदालत ने यह भी सवाल उठाया था कि सरकार जिस आयोग की रिपोर्ट और आंकड़ों पर निर्भर कर रही है, उस रिपोर्ट पर सरकार ने अभी अंतिम निर्णय लिया ही नहीं था।
छह सप्ताह में चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का आदेश
आरक्षण आदेश रद्द करने के साथ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया छह सप्ताह के भीतर शुरू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने और चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ाने को कहा है।
चुनाव टालने की मांग भी खारिज
स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर दाखिल दूसरी याचिकाओं पर भी अदालत ने निर्देश दिए। वार्ड परिसीमन और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों के आधार पर चुनाव टालने की मांग को अदालत ने स्वीकार नहीं किया। SIR प्रक्रिया चलने के आधार पर चुनाव रोकने की मांग वाली याचिका भी निस्तारित कर दी गई।
अब आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों की अगली प्रक्रिया अदालत के इस फैसले के बाद आगे बढ़ेगी। वहीं, 34 फीसदी BC आरक्षण को लेकर सरकार के सामने आगे की कानूनी और प्रशासनिक राह महत्वपूर्ण होगी। यह फैसला स्थानीय निकायों में आरक्षण की सीमा और उसके लिए जरूरी आंकड़ों को लेकर चल रही बहस को भी फिर सामने ले आया है।





