CJP के मुंबई प्रदर्शन से पहले सोनम वांगचुक का बड़ा बयान, बोले- सही सोच वालों को साथ आना चाहिए

सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी के 2 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किसी एक व्यक्ति के आंदोलन करने की बात नहीं होनी चाहिए, बल्कि जब किसी मुद्दे को गलत माना जाए तो समान सोच रखने वाले लोगों को साथ आकर अपनी आवाज उठानी चाहिए।
CJP के प्रदर्शन से पहले वांगचुक की प्रतिक्रिया
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को मुंबई में प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी ने इस आंदोलन को ‘जेल भरो आंदोलन’ के तौर पर पेश किया है। हालांकि, मुंबई पुलिस की अनुमति को लेकर भी विवाद सामने आया है।
क्या अकेले दीपके ले पाएंगे इस्तीफा?
सोनम वांगचुक से जब पूछा गया कि क्या अभिजीत दीपके अकेले ही ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा ले लेंगे, तो उन्होंने इस सवाल को ही अलग नजरिए से देखने की बात कही। वांगचुक ने कहा कि किसी एक व्यक्ति के ऐसा करने का सवाल ही नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, अगर किसी मुद्दे को गलत माना जाता है तो समान सोच रखने वाले लोगों को मिलकर आवाज उठानी चाहिए।
‘नैतिक बल है तो साथ आना चाहिए’
‘द देशभक्त’ यूट्यूब चैनल पर बातचीत में वांगचुक ने कहा कि किसी मुद्दे पर कार्रवाई की जिम्मेदारी केवल एक व्यक्ति की नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर लोगों के भीतर नैतिक बल है, तो उन्हें साथ आकर अपनी बात रखनी चाहिए। उनके बयान का केंद्र सामूहिक भागीदारी और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने पर रहा।
CJP की मुख्य मांग क्या है?
सितंबर में अभिजीत दीपके ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया था। CJP ने इसके अलावा चुनावी प्रक्रिया से जुड़े Special Intensive Revision यानी SIR को रोकने, पुराने मतदाता रिकॉर्ड को बहाल करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून में बदलाव जैसी मांगें भी रखी हैं। ये CJP की मांगें हैं, न कि स्थापित तथ्य या निष्कर्ष।
वांगचुक पहले भी दे चुके हैं समर्थन
सोनम वांगचुक इससे पहले भी CJP के अक्टूबर आंदोलन को समर्थन देने की बात कह चुके हैं। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने आंदोलन के उद्देश्य के प्रति समर्थन जताया, हालांकि यह भी कहा गया कि वह प्रदर्शन में व्यक्तिगत रूप से मौजूद न भी हों।
अब 2 अक्टूबर पर नजर
CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन और वांगचुक के बयान ने चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग को लेकर चल रही सार्वजनिक बहस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। आगे इस आंदोलन में कितनी भागीदारी होती है और प्रशासन इसे लेकर क्या कदम उठाता है, यह 2 अक्टूबर के घटनाक्रम से स्पष्ट होगा।
वांगचुक के बयान का मूल संदेश यही है कि लोकतांत्रिक असहमति को केवल किसी एक चेहरे से जोड़ने के बजाय लोग अपने विचारों के आधार पर सामूहिक रूप से अपनी आवाज रख सकते हैं।





