रीवा सैनिक स्कूल में थलसेना प्रमुख का दमदार संदेश: कैडेट्स बनें रोल मॉडल असफलता को बनाएं सफलता की सीढ़ी

रीवा। शहर के प्रतिष्ठित सैनिक स्कूल में उस समय गौरवपूर्ण माहौल बन गया जब भारतीय थलसेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम का आगमन हुआ। अपरान्ह 12 बजे जैसे ही मुख्य अतिथि विद्यालय पहुंचे पूरे परिसर में उत्साह और अनुशासन का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम की शुरुआत सैनवा मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई जहां थलसेना प्रमुख ने वीर शहीदों को नमन किया। इसके बाद उन्होंने विद्यालय के परेड ग्राउंड पर कैडेट्स की शानदार परेड का निरीक्षण किया। कैडेट्स की अनुशासनबद्ध प्रस्तुति और जोश ने मुख्य अतिथि को विशेष रूप से प्रभावित किया।
इस अवसर पर मानेकशॉ सभागार में एक भव्य विशेष सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि के औपचारिक स्वागत से हुई। इसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों सैन्यकर्मियों और पूर्व छात्रों को सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वालों में कमांडर जे. एस. खोत, प्रशासनिक अधिकारी डॉ. एन. के. झा (पीजीटी मैथ्स), प्रभाकर चक्रवर्ती (पीजीटी फिजिक्स) हवलदार उमा शंकर एम तथा संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय के चिकित्सक एवं विद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. सौरभ पटेल शामिल रहे। इन सभी को उनकी कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट सेवाओं के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
इसके साथ ही पूर्व सैन्यकर्मियों कर्नल जी. पी. सिंह (सेवानिवृत्त) हवलदार योगेश कुमार तिवारी (सेवानिवृत्त) और नायक अनिल कुमार तिवारी (सेवानिवृत्त) को वेटरन अचीवर्स अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस सम्मान ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों को प्रेरणा से भर दिया।
कार्यक्रम की अगली कड़ी में विद्यालय के नवनियुक्त छात्र पदाधिकारियों का पद अलंकरण किया गया। कैडेट अभय प्रताप सिंह को स्कूल कैप्टन, कैडेट सी. एच. कुंदना को स्कूल गर्ल्स कैप्टन, कैडेट दिव्यांश यादव को स्कूल वाइस कैप्टन, कैडेट देवराज इन्दोरिया को स्कूल एडजुटेंट, कैडेट प्रशांत कुशवाहा को स्कूल मेस कैप्टन और कैडेट अनुराग सिंह को स्कूल स्पोर्ट्स कैप्टन के रूप में नियुक्त किया गया।
अपने प्रेरणादायक संबोधन में थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा करते हुए अपने शिक्षकों को अपनी सफलता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि आज भी मेरे शिक्षकों के शब्द मुझे प्रेरित करते हैं और सही दिशा दिखाते हैं।
कैडेट्स को संबोधित करते हुए उन्होंने उन्हें केवल अनुशासित सैनिक ही नहीं बल्कि समाज के रोल मॉडल बनने की प्रेरणा दी। उन्होंने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनने पर विशेष बल दिया।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि असफलता कोई बाधा नहीं बल्कि सफलता की पहली सीढ़ी है। कैडेट्स को निरंतर प्रयास करते रहने और अपने सपनों को वास्तविकता में बदलने के लिए प्रेरित किया। साथ ही उन्होंने आधुनिक तकनीक के सही उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि तकनीक तभी सार्थक है जब उसका उपयोग राष्ट्र निर्माण में हो।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्राचार्य कर्नल अविनाश रावल, वीएसएम ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। वहीं थलसेना प्रमुख ने भी विद्यालय को स्मृति चिन्ह प्रदान करते हुए दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जो संस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
अंत में प्राचार्य ने सभी अतिथियों शिक्षकों और कैडेट्स का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ लेकिन जनरल द्विवेदी के प्रेरणादायक शब्द लंबे समय तक कैडेट्स के मन में गूंजते रहेंगे।
यह आयोजन न केवल सम्मान और गौरव का प्रतीक बना बल्कि कैडेट्स के भीतर देशभक्ति अनुशासन और नेतृत्व के नए बीज भी बो गया।






