उत्तर प्रदेश

राज्यसभा उम्मीदवारों पर अपर्णा यादव का बड़ा बयान, बोलीं- बीजेपी ने कार्यकर्ताओं को दिया मौका

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तस्वीर अब लगभग साफ हो गई है। बीजेपी के सभी आठ उम्मीदवारों ने 6 अक्टूबर को लखनऊ में नामांकन दाखिल कर दिया। इसी बीच बीजेपी नेता अपर्णा यादव ने पार्टी के उम्मीदवारों के चयन की तारीफ करते हुए कहा कि बीजेपी ने संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं को राज्यसभा भेजने का मौका दिया है। उन्होंने बिना नाम लिए विपक्ष पर भी निशाना साधा।

अपर्णा यादव ने किस बात पर साधा निशाना?

अपर्णा यादव ने कहा कि बीजेपी ने ऐसे नेताओं को मौका दिया है, जिन्होंने लंबे समय तक संगठन के लिए काम किया और पार्टी को अपना समय दिया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं का सम्मान किया है।

अपर्णा ने बिना किसी पार्टी का नाम लिए कहा कि बीजेपी ने किसी उद्योगपति या धनपति को टिकट देने के बजाय अपने संगठन से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी है। उनका यह बयान समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार धनराज परिमल नथवानी के संदर्भ में देखा जा रहा है, हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर उनका नाम नहीं लिया।

बीजेपी के आठ उम्मीदवारों ने दाखिल किया नामांकन

बीजेपी ने यूपी की 10 खाली हो रही राज्यसभा सीटों में से आठ पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। इनमें धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। पार्टी ने इस बार किसी मौजूदा राज्यसभा सांसद को दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया है।

नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी और दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

सपा ने दो उम्मीदवार ही उतारे

समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा के लिए प्रोफेसर राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार बनाया है। नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े कारोबारी हैं। सपा ने शुरुआत में तीसरे उम्मीदवार की संभावना पर विचार किया था, लेकिन अब तीसरा प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा गया है।

इसके बाद यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर बीजेपी के आठ और सपा के दो उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की स्थिति बन गई है।

तीसरे उम्मीदवार पर भी बोलीं अपर्णा यादव

जब अपर्णा यादव से सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारे जाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि विपक्ष शायद दबाव में आ गया, इसलिए तीसरा उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा गया।

हालांकि, सपा की ओर से तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने के पीछे अखिलेश यादव ने अपनी रणनीति को लेकर अलग राजनीतिक संदेश दिया है। ऐसे में अपर्णा यादव का बयान बीजेपी और सपा के बीच चल रही सियासी बयानबाजी का हिस्सा माना जा रहा है।

उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक संतुलन

बीजेपी की सूची में तीन ओबीसी, दो दलित, दो ब्राह्मण और एक ठाकुर चेहरे शामिल हैं। पार्टी ने संगठन में सक्रिय नेताओं के साथ अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।

इन उम्मीदवारों के चयन को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। बीजेपी के सामने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ अलग-अलग सामाजिक समीकरणों को साधने की चुनौती है।

अब आगे क्या होगा?

राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर नाम वापसी की आखिरी तारीख है। अगर सभी नामांकन वैध पाए जाते हैं तो यूपी की सभी 10 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाएंगे। चुनाव कार्यक्रम के अनुसार मतदान 16 अक्टूबर को होना है।

ऐसे में अब राज्यसभा चुनाव से ज्यादा चर्चा बीजेपी के उम्मीदवार चयन, सपा की रणनीति और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के राजनीतिक संदेश को लेकर है।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button

Discover more from Media Auditor

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue Reading

%d