68500 शिक्षक भर्ती को लेकर शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव, 5% छूट के साथ संशोधित सूची की मांग

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद एक बार फिर सड़क पर आ गया है। भर्ती में कथित विसंगतियों को लेकर अभ्यर्थियों ने सोमवार को शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थी सड़क पर लेट गए और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग 5 प्रतिशत छूट का लाभ देते हुए संशोधित चयन सूची जारी करने की है।
सड़क पर लेटकर किया प्रदर्शन
शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव करने पहुंचे अभ्यर्थियों ने अलग अंदाज में विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए। कई अभ्यर्थियों ने ‘आरक्षण घोटाला’ लिखी टोपी पहन रखी थी और सीटी बजाकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए।
प्रदर्शन करीब 45 मिनट तक चला। मौके पर पुलिस पहुंची और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
पुलिस और अभ्यर्थियों के अलग-अलग दावे
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें जबरन हटाने की कोशिश की। अभ्यर्थियों ने पुलिस पर बदसलूकी और धक्का-मुक्की करने का भी आरोप लगाया।
वहीं पुलिस का कहना है कि मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेजा गया, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
5 प्रतिशत छूट के साथ संशोधित सूची की मांग
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने 2018 की भर्ती में आरक्षण का लाभ दिए जाने की मांग की। उनका कहना है कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नियमों के अनुसार 5 प्रतिशत की छूट का लाभ मिलना चाहिए था।
अभ्यर्थियों ने सरकार से संशोधित चयन सूची जारी करने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने ‘ऐसी क्या मजबूरी है-आरक्षण की चोरी है’ और ‘पिछड़ा आयोग ने माना है-आरक्षण घोटाला है’ जैसे नारे भी लगाए।
‘नियुक्ति या अर्थी’ का ऐलान
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए कहा कि इस बार वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें या तो नियुक्ति चाहिए या फिर उनका संघर्ष अंतिम स्थिति तक जाएगा।
हालांकि, प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरक्षण संबंधी आरोपों और भर्ती प्रक्रिया में कथित विसंगतियों का अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित प्राधिकरणों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
आठ साल से जारी है अभ्यर्थियों का संघर्ष
अभ्यर्थियों का कहना है कि 2018 में हुई 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण के प्रावधानों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया। उनका आरोप है कि इसकी वजह से आरक्षित वर्गों को मिलने वाली 5 प्रतिशत छूट का उचित लाभ नहीं मिल सका।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, इसी मुद्दे को लेकर वे करीब आठ वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उनका दावा है कि इस दौरान सरकार की ओर से कई बार आश्वासन मिले, लेकिन उनकी मांग के मुताबिक भर्ती सूची में संशोधन नहीं किया गया।
सरकार के सामने फिर खड़ा हुआ पुराना मुद्दा
68,500 सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़ा विवाद एक बार फिर लखनऊ की सड़कों पर पहुंच गया है। अभ्यर्थी संशोधित चयन सूची और आरक्षण नियमों के अनुरूप 5 प्रतिशत छूट का लाभ देने की मांग पर कायम हैं।
अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस पुराने भर्ती विवाद को लेकर क्या कदम उठाती है और अभ्यर्थियों की संशोधित चयन सूची की मांग पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है या नहीं।





