तमिलनाडु में नर्सों का प्रदर्शन, बातचीत के लिए बुलाए 5 नेताओं की गिरफ्तारी का आरोप

तमिलनाडु में वेतन और नौकरी से जुड़ी मांगों को लेकर नर्सों का आंदोलन तेज हो गया है। प्रदर्शनकारी नर्सों ने राज्य सरकार पर भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बातचीत के लिए सचिवालय बुलाए गए पांच नर्स नेताओं को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है।
चेन्नई में जुटीं करीब 4 हजार नर्सें
तमिलनाडु इंटरमीडिएट हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन के आह्वान पर राज्यभर से करीब 4 हजार नर्सें चेन्नई के रत्नम स्टेडियम के पास पहुंचीं। प्रदर्शनकारी लंबे समय से वेतन, स्थायी रोजगार और नौकरी की सुरक्षा समेत कई मांगें उठा रही हैं।
नर्सों की प्रमुख मांगों में हर महीने 45 हजार रुपये वेतन, समान काम के लिए समान वेतन, स्थायी रोजगार, नौकरी की सुरक्षा और लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान शामिल है।
बातचीत के लिए भेजे गए थे 5 प्रतिनिधि
प्रदर्शनकारियों को कानूनी मदद दे रहे अधिवक्ता वरथराजन ने दावा किया कि सरकार की ओर से बातचीत के लिए नर्स नेताओं को सचिवालय बुलाया गया था। इसके बाद करीब 4 हजार प्रदर्शनकारियों ने प्रतिनिधिमंडल के तौर पर पांच नेताओं को बातचीत के लिए भेजा।
वकील के मुताबिक, पांचों नेता सचिवालय पहुंचे, लेकिन वहां पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई को सरकार की ओर से विश्वासघात बताया है।
‘बड़ा धोखा, आंदोलन जारी रहेगा’
अधिवक्ता वरथराजन ने पुलिस कार्रवाई को ‘बड़ा धोखा’ बताते हुए कहा कि नर्सों का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस के जरिए प्रदर्शन को दबाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों को जेल भेज दिया जाए, तब भी उनका संघर्ष जारी रहेगा। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार या पुलिस का आधिकारिक पक्ष इस विवरण में उपलब्ध नहीं है।
भूख हड़ताल कर रहीं नर्सों को भी हिरासत में लिया गया
चेन्नई में कुछ नर्सें भूख हड़ताल पर भी बैठी थीं। प्रदर्शन स्थल पर तय समय के बाद भी हटने से इनकार करने पर पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। इससे आंदोलन को लेकर तनाव और बढ़ गया।
वकील ने यह भी कहा कि यदि आंदोलन के दौरान किसी नर्स को नुकसान पहुंचता है तो इसके लिए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। यह प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया आरोप है।
45 हजार रुपये वेतन और स्थायी नौकरी की मांग
यूनियन की अध्यक्ष एन. सुंदरी के मुताबिक, मिड-लेवल हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स कई तरह की स्वास्थ्य सेवाएं देने के बावजूद फिलहाल करीब 21 हजार रुपये प्रतिमाह प्राप्त कर रहे हैं। संगठन इसे उनकी जिम्मेदारियों के मुकाबले अपर्याप्त बता रहा है।
नर्सों की मांग है कि वेतन बढ़ाकर 45 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाए और समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत लागू किया जाए। इसके अलावा स्थायी रोजगार और नौकरी की सुरक्षा भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।
CHO पद और लंबित प्रोत्साहन राशि की मांग
प्रदर्शनकारी मिड-लेवल हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के पद का नाम बदलकर कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) करने और इस पद की मान्यता वाला प्रमाणपत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं।
यूनियन का कहना है कि वर्ष 2023 और 2024 की लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान भी किया जाए। साथ ही मिड-लेवल हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स को सवैतनिक मातृत्व अवकाश देने की मांग भी उठाई गई है।
तमिलनाडु में नर्सों का यह आंदोलन अब केवल वेतन बढ़ाने की मांग तक सीमित नहीं रह गया है। प्रदर्शनकारी स्थायी रोजगार, नौकरी की सुरक्षा, प्रोत्साहन राशि, मातृत्व अवकाश और CHO के रूप में मान्यता जैसी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं। पांच नेताओं की कथित गिरफ्तारी के बाद आंदोलन और तेज होने के संकेत हैं।





