रीवा में कोरेक्स का खुला खेल, IG के दावे पर बड़ा सवाल! गले में कोरेक्स की सैकड़ों खाली शीशियां पहनकर सड़क पर उतरे लोग; बोले जब शहर को नशामुक्त करने का दावा है तो फिर ये शीशियां कहां से आ रही हैं?

मीडिया ऑडीटर रीवा। रीवा रेंज के IG द्वारा रीवा को कोरेक्स मुक्त और नशामुक्त बनाने का दावा किया गया था। लेकिन अब शहर की सड़कों पर गले में कोरेक्स की खाली शीशियों की माला पहनकर प्रदर्शन कर रहे लोग उस दावे के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं। रविवार को शहीद भगत सिंह सेवा समिति के कार्यकर्ताओं ने अनोखे अंदाज में विरोध जताते हुए सैकड़ों खाली कोरेक्स शीशियों की माला पहनी और हाथों में झाड़ू लेकर सड़क पर उतर गए।
IG के दावे के सामने खाली शीशियों का सवाल
रीवा रेंज के IG ने पुलिस की कार्रवाई के दौरान रीवा को कोरेक्स मुक्त और नशामुक्त बनाने की बात कही थी। ऐसे में अब सवाल यह है कि यदि अभियान इतना प्रभावी है तो शहर में कोरेक्स की खाली शीशियों का इतना बड़ा ढेर कहां से आ रहा है? इन्हीं सवालों को लेकर सामाजिक संगठन ने सड़क पर उतरकर पुलिस और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया।
शहीद भगत सिंह सेवा समिति के अध्यक्ष सुजीत द्विवेदी के नेतृत्व में अग्रसेन चौक और कोठी कंपाउंड क्षेत्र में प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं ने गले में खाली कोरेक्स की शीशियों की माला पहनकर और झाड़ू लगाकर प्रतीकात्मक रूप से संदेश दिया कि शहर को केवल गंदगी से नहीं बल्कि नशे के कथित कारोबार से भी साफ करने की जरूरत है।
एक थाना प्रभारी का दावा अंदर के संरक्षण के बिना तस्करी बंद नहीं होगी
मामले को और गंभीर बनाता है एक तत्कालीन थाना प्रभारी से हुई बातचीत का दावा। नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर थाना प्रभारी ने कथित तौर पर कहा था कि जब तक पुलिस के अंदर ही तस्करों को संरक्षण देने वाले लोग मौजूद रहेंगे तब तक तस्करी पूरी तरह बंद नहीं हो सकती।
इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को WhatsApp चैट और कुछ साक्ष्य दिए जाने का भी दावा किया गया लेकिन कार्रवाई क्यों नहीं हुई यह सवाल आज भी बना हुआ है। यह आरोप सही हैं या नहीं इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। लेकिन यदि किसी पुलिस अधिकारी ने वरिष्ठ अधिकारियों तक ऐसी जानकारी पहुंचाई थी तो उस पर क्या जांच हुई, इसका जवाब सामने आना भी जरूरी है।
आदित्य का फरार होना बना काला धब्बा?
इसी बीच तस्करी से जुड़े बताए जा रहे आदित्य के पुलिस अभिरक्षा से फरार होने की घटना ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। ओडिशा पुलिस द्वारा पकड़े गए आदित्य को अभिरक्षा में रीवा लाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में पुलिस टीम पर हमला हुआ और आरोपी फरार हो गया।
घटना में एक हमलावर के पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि मुख्य आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है। रीवा रेंज की पुलिस कितनी सक्रियता से काम कर रही है इसका आकलन अब इस घटना के बाद की कार्रवाई से भी किया जा सकता है। आखिर पुलिस अभिरक्षा में मौजूद आरोपी को छुड़ाने की हिम्मत किसके भरोसे हुई? उसके पीछे कौन लोग थे? और क्या उसके रीवा से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल होगी?
चार सवाल, जिनसे नहीं बच सकती पुलिस
1. रीवा को कोरेक्स मुक्त बनाने के दावे के बावजूद खाली शीशियों की इतनी बड़ी संख्या कहां से आ रही है?
2. तस्करों को पुलिस के अंदर से संरक्षण देने के आरोपों की जांच क्यों नहीं हुई?
3. वरिष्ठ अधिकारियों को कथित WhatsApp चैट और साक्ष्य दिए गए थे तो उन पर क्या कार्रवाई हुई?
4. पुलिस अभिरक्षा से आदित्य के फरार होने की घटना के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?





