गरबा को लेकर मुस्लिम त्योहार कमेटी की अपील, युवाओं से विवाद से दूर रहने की सलाह

नवरात्रि और गरबा आयोजनों से पहले मध्य प्रदेश में धार्मिक आयोजनों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच मुस्लिम त्योहार कमेटी ने मुस्लिम युवाओं से अपील की है कि वे केवल रील्स, लाइक्स और व्यूज के लिए गरबा या किसी अन्य धार्मिक आयोजन में अनावश्यक रूप से शामिल होने से बचें। कमेटी ने युवाओं से शांति, संयम और सभी धर्मों की आस्था का सम्मान करने की अपील की है।
गरबा में न जाने की अपील क्यों?
मध्य प्रदेश मुस्लिम त्योहार कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीशान रहमान उर्फ शानू ने युवाओं से कहा कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए किसी धार्मिक आयोजन में शामिल होकर विवाद की स्थिति पैदा करने से बचना चाहिए। उनका कहना है कि किसी एक व्यक्ति की गलती का असर परिवार और समाज पर भी पड़ सकता है।
कमेटी ने इस अपील को किसी धर्म या गरबा आयोजन के विरोध के रूप में पेश नहीं किया है। उसका कहना है कि उद्देश्य युवाओं को जिम्मेदार व्यवहार और सामाजिक सद्भाव के प्रति जागरूक करना है।
उलेमा और धर्मगुरुओं से भी संवाद की तैयारी
कमेटी का कहना है कि वह मुस्लिम समाज के उलेमा, मुफ्ती और काजी सहित धर्मगुरुओं से भी युवाओं को संयम बरतने का संदेश देने की अपील करेगी। संगठन चाहता है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान किसी तरह का विवाद या टकराव पैदा न हो।
कमेटी ने युवाओं से कानून का पालन करने और ऐसी किसी गतिविधि से बचने को कहा है, जिससे सामाजिक माहौल खराब हो सकता है।
रील्स, लाइक्स और व्यूज का जिक्र
जीशान रहमान ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए युवाओं से कहा कि केवल रील बनाने या लाइक्स और व्यूज हासिल करने के लिए किसी धार्मिक आयोजन में जाने से बचना चाहिए।
उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर बनाई गई एक वीडियो या किसी गतिविधि को लेकर विवाद खड़ा होने पर उसका असर सिर्फ उस व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इसलिए युवाओं को अपने व्यवहार की जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
प्रशासन को भी लिखा पत्र
मुस्लिम त्योहार कमेटी ने शासन और प्रशासन को पत्र लिखकर विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, तकनीकी और चिकित्सा संस्थानों तथा छात्रावासों तक जागरूकता संदेश पहुंचाने का आग्रह किया है। कमेटी का कहना है कि नवरात्रि से पहले युवाओं तक यह संदेश पहुंचाना जरूरी है, ताकि त्योहारों के दौरान शांति और सामाजिक सद्भाव बना रहे।
गरबा आयोजनों में पहचान को लेकर पहले भी विवाद
गरबा आयोजनों में मुस्लिम युवाओं की भागीदारी को लेकर मध्य प्रदेश समेत कई जगहों पर पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। कुछ हिंदू संगठनों और नेताओं की ओर से आयोजनों में प्रवेश से पहले पहचान-पत्र की जांच की मांग उठती रही है। इसी पृष्ठभूमि में इस बार मुस्लिम त्योहार कमेटी की ओर से आई अपील को अलग तरह से देखा जा रहा है।
हालांकि, धार्मिक आयोजनों में किसे प्रवेश दिया जाए या नहीं, यह आयोजनकर्ताओं और संबंधित प्रशासनिक नियमों का विषय है। ऐसे में इस पूरे मुद्दे में कानून व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना अहम रहेगा।
नवरात्रि से पहले संदेश क्या है?
नवरात्रि के आयोजन शुरू होने से पहले मुस्लिम त्योहार कमेटी की अपील का मूल संदेश विवाद से बचने और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने पर केंद्रित है। अब देखना होगा कि प्रशासन, आयोजन समितियां और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि त्योहारों के दौरान किस तरह समन्वय बनाए रखते हैं।





