राष्ट्रीय

CM योगी ने कांवड़ यात्रा को बताया समरसता का महापर्व, श्रद्धा के साथ सेवा और अनुशासन का दिया संदेश

श्रावण की पवित्र कांवड़ यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम भावनात्मक पत्र लिखा है। उन्होंने इसे केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, अनुशासन, सेवा और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को जीवंत करने वाला महापर्व बताया।

करोड़ों श्रद्धालुओं को जोड़ती है कांवड़ यात्रा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी पाती में कहा कि भारतीय परंपराओं की कुछ यात्राएं धार्मिक अनुष्ठान से कहीं आगे होती हैं। वे समाज, संस्कृति और लोकजीवन की जीवंत पाठशाला बन जाती हैं। श्रावण में निकलने वाली कांवड़ यात्रा भी ऐसी ही परंपरा है, जो हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं को शिवभक्ति के सूत्र में जोड़ती है।

भगवा वस्त्र, कांवड़ और एक लक्ष्य

योगी ने कांवड़ियों की पहचान बताते हुए कहा कि भगवा वस्त्र, कंधे पर कांवड़ और हृदय में भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा उन्हें एक सूत्र में बांधती है। यात्रा में किसी की चाल अलग हो सकती है, लेकिन मंजिल एक ही रहती है—महादेव का जलाभिषेक।

उनके अनुसार कांवड़ यात्रा में जाति, वर्ग, भाषा, क्षेत्र और आर्थिक स्थिति जैसे भेद पीछे छूट जाते हैं। यही कारण है कि इसे समरसता का महापर्व कहा जा सकता है।

तप, सेवा और दिव्यांग श्रद्धालुओं का जज्बा

मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के तप और समर्पण को भी विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि तप से चरित्र मजबूत होता है, सेवा से समाज संवरता है और एकता से राष्ट्र मजबूत होता है।

दिव्यांग शिवभक्तों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि कठिनाइयों के बावजूद उनकी आस्था और यात्रा पूरी करने का संकल्प समाज के लिए प्रेरणा है।

सरकार ने किए विशेष इंतजाम

कांवड़ियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने यात्रा मार्गों पर स्वच्छता, पेयजल, चिकित्सा और यातायात प्रबंधन की व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की बात कही है। निगरानी व्यवस्था के साथ श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पुष्पवर्षा जैसी तैयारियां भी की गई हैं।

सेवा और पर्यावरण का संदेश

योगी ने श्रद्धालुओं से कांवड़ यात्रा को सामाजिक उत्तरदायित्व और सेवा का उत्सव बनाने की अपील की। उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल कांवड़ अपनाने और प्लास्टिक मुक्त जीवन का संकल्प लेने को कहा।

उन्होंने यह भी आग्रह किया कि रास्ते में एंबुलेंस या विद्यालय वाहन दिखाई दे तो उसे प्राथमिकता दी जाए। उनकी अपील का संदेश साफ है—आस्था के साथ संवेदनशीलता भी जरूरी है।

श्रद्धा के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी

कांवड़ यात्रा की असली शक्ति केवल शिवभक्ति में नहीं, बल्कि अनुशासन, संयम, सेवा और भाईचारे में भी है। मुख्यमंत्री का संदेश इसी भावना को आगे बढ़ाता है कि धार्मिक आस्था तभी व्यापक सामाजिक शक्ति बनती है, जब उसके साथ दूसरों के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी भी जुड़ी हो। यही कांवड़ यात्रा को लोकमंगल और समरसता की परंपरा बनाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Back to top button

Discover more from Media Auditor

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue Reading

%d