रीवा में निवास, गुढ़ तहसील में जिम्मेदारी? नायब तहसीलदार की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, नामांतरण से लेकर सीमांकन तक फरियादी परेशान

रीवा। गुढ़ तहसील कार्यालय में राजस्व मामलों को लेकर आम लोगों की परेशानी लगातार सामने आने के आरोप हैं। खासतौर पर नामांतरण, सीमांकन, सिविल कोर्ट के आदेशों के पालन और सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण को लेकर फरियादियों को कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इसी बीच गुढ़ सर्किल की नायब तहसीलदार के मुख्यालय से अधिक रीवा में रहने को लेकर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
फरियादियों का आरोप है कि कई राजस्व प्रकरणों में फाइलें लंबे समय तक लंबित रहती हैं और संबंधित पक्षों को स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती कि उनके मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है। लोगों का कहना है कि तहसील कार्यालय में सीढ़ियां चढ़ते-उतरते हुए भी कई बार उन्हें अपने प्रकरण के निराकरण के लिए इंतजार करना पड़ता है। नामांतरण जैसे सामान्य राजस्व मामलों से लेकर सीमांकन और न्यायालयीन आदेशों के पालन तक में देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
एक मामले में बताया जा रहा है कि करीब 15 वर्ष पुराने सिविल कोर्ट के आदेश के आधार पर कार्रवाई के लिए आवेदन किया गया था। वहीं भूमि स्वामी की ओर से नामांतरण पर रोक लगाए जाने की मांग को लेकर आपत्ति भी प्रस्तुत की गई जिसे न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने की बात सामने आ रही है। इसके बावजूद गुढ़ तहसील में आगे की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मामले में यह भी आरोप है कि संबंधित फाइल कई घंटे एसडीएम कार्यालय में रखी रही लेकिन आवेदक को स्पष्ट निराकरण देने के बजाय अलग-अलग कारण बताए जाते रहे। जब मामले को लेकर सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत की गई तो आपत्ति का हवाला दिए जाने की बात सामने आई। अब सवाल यह है कि यदि न्यायालय द्वारा संबंधित आपत्ति खारिज की जा चुकी थी तो उसके बाद राजस्व प्रकरण में कार्रवाई क्यों लंबित रही फरियादियों की ओर से यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई मामलों में अनावश्यक देरी के पीछे व्यक्तिगत स्तर पर दबाव या आर्थिक लेनदेन की चर्चा रहती है। सबसे बड़ा सवाल अधिकारी के मुख्यालय में रहने और कार्यालयीन उपलब्धता को लेकर है। शासन द्वारा अधिकारी को क्षेत्रीय जिम्मेदारी निभाने के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे में यदि अधिकारी का अधिकांश समय मुख्यालय से बाहर बीतता है तो इसकी प्रशासनिक निगरानी कौन करता है और प्रतिदिन होने वाले सरकारी व्यय का औचित्य क्या है?





