Nainital News: दूषित पानी से 2 मौतों के बाद 6 इंजीनियर निलंबित, ज्योलीकोट में 400 से ज्यादा लोग बीमार

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और आसपास के गांवों में दूषित पेयजल से फैली बीमारी के मामले में सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर छह इंजीनियरों को निलंबित किया गया है। क्षेत्र में सैकड़ों लोग बीमार हुए और दो लोगों की मौत हुई।
दूषित पानी के मामले में 6 इंजीनियरों पर कार्रवाई
ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पेयजल की आपूर्ति और इसके बाद जलजनित बीमारियों के फैलने के मामले में उत्तराखंड सरकार ने जल संस्थान और पेयजल निगम के छह इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर की गई। अधिकारियों पर अपने सरकारी दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही बरतने के आरोप हैं।
निलंबित अधिकारियों में हल्द्वानी के प्रभारी अधीक्षण अभियंता, नैनीताल जल संस्थान के सहायक अभियंता और अपर सहायक अभियंता तथा पेयजल निगम भीमताल के अधिशासी अभियंता, प्रभारी सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता शामिल हैं। नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को चेतावनी भी दी गई है।
400 से ज्यादा लोगों के बीमार होने की रिपोर्ट
ज्योलीकोट और आसपास के इलाकों में जलजनित बीमारी के मामले सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोग बीमार हुए। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार प्रभावित क्षेत्र में 400 से अधिक लोग बीमार पड़े। पीलिया और डायरिया समेत कई जलजनित बीमारियों के मामले सामने आए।
प्रभावित क्षेत्रों में ज्योलीकोट के अलावा बेलुवाखान, गेठिया, सड़ियाताल, दुर्गापुर, गंजा, वीरभट्टी और छीना जैसे इलाके शामिल बताए गए हैं। दो मौतों के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चिंता और आक्रोश भी बढ़ा था।
16 वर्षीय छात्र और 26 वर्षीय महिला की मौत
इस मामले में एक 16 वर्षीय छात्र और 26 वर्षीय महिला की मौत की पुष्टि करने वाली रिपोर्टें सामने आई थीं। दोनों की तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज कराया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान दूषित पानी और जलजनित बीमारियों के संबंध में भी गंभीर चिंता जताई गई। हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में मौतों और बीमारियों की संख्या अलग-अलग समय पर अलग बताई गई है, इसलिए मौजूदा सरकारी कार्रवाई के संदर्भ में दो मौतों का आंकड़ा प्रमुख रूप से सामने आया है।
हाई कोर्ट ने स्थिति को बताया था ‘महामारी’
मामले में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने 8 सितंबर को सुनवाई के दौरान स्थिति पर कड़ा रुख अपनाया था। अदालत ने ज्योलीकोट और आसपास के गांवों में स्वच्छ पेयजल और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने स्थिति को ‘महामारी’ जैसा बताते हुए नैनीताल के जिलाधिकारी को राहत कार्यों की व्यक्तिगत निगरानी करने को कहा था।
अदालत ने पानी की जांच केवल विभागीय स्तर पर कराने के बजाय निजी प्रयोगशालाओं से भी कराने पर जोर दिया था। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में पानी के नमूने लेने और उनकी जांच कराने के निर्देश दिए गए थे।
पानी के सैंपल और पाइपलाइन की जांच के निर्देश
हाई कोर्ट ने जल संस्थान और पेयजल निगम को यह सुनिश्चित करने को कहा कि सीवर और पेयजल की पाइपलाइन आपस में न मिलें। कोर्ट ने नैनिताल और आसपास के इलाकों में जल स्रोतों से नमूने लेने तथा उनकी गुणवत्ता की जांच कराने के निर्देश दिए।
बाद की जांच में भी कुछ स्थानों के पानी के नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने की रिपोर्ट सामने आई। 15 सितंबर की सुनवाई से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में 10 स्थानों के नमूने फेल पाए गए थे।
प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाई गईं
बीमारी फैलने के बाद प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाई गईं। मेडिकल टीमों को घर-घर भेजकर लोगों की जांच की गई और क्लोरीन की गोलियां तथा ओआरएस वितरित किए गए। जरूरत के अनुसार चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई।
हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि यदि स्थानीय स्तर पर पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं तो बाहर से विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाया जाए। साथ ही कुमाऊं क्षेत्र में जल परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित करने के प्रस्ताव पर जल्द निर्णय लेने को कहा गया था।
सरकार ने लापरवाही पर सख्त कार्रवाई का संदेश दिया
छह इंजीनियरों का निलंबन इस मामले में प्रशासनिक जिम्मेदारी तय करने की दिशा में बड़ी कार्रवाई है। सरकार ने संकेत दिया है कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में लापरवाही मिलने पर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मामले में आगे की जांच और प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि हाई कोर्ट भी पानी की जांच और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने को लेकर पहले ही निर्देश जारी कर चुका है।





