अपराधरीवा

बिछिया थाना प्रभारी का कारनामा सुर्खियों में – घर से पकड़ा, थाने में कुछ नहीं, फिर नदी किनारे 4 किलो 900 ग्राम गांजा कैसे मिला?अवैध मादक पदार्थ की खुली बिक्री के बीच निर्दोषों पर कार्रवाई का आरोप

रीवा रेंज के रीवा जिले में बिछिया थाना प्रभारी का एक कारनामा इन दिनों सुर्खियों में है। सवाल बड़ा है – जिसे जहाँ से गिरफ्तार किया गया वहाँ कुछ नहीं मिला, तो थाने ले जाने के बाद 4 किलो 900 ग्राम गांजा कैसे बरामद हो गया? इस सवाल ने पूरी पुलिस कार्यवाही पर ही प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

एक तरफ रीवा जिले में इस समय अवैध मादक पदार्थ की खुलेआम बिक्री हो रही है, तो दूसरी तरफ निर्दोष लोगों पर अघोषित कार्रवाई की बात भी सामने आ रही है। ताजा मामला बिछिया थाना क्षेत्र का है जिसने पुलिस की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित परिवार के अनुसार दिनांक 11 अक्टूबर 2026 को शाम करीब 7 बजे जावेद अहमद अपने नए मकान की मरम्मत करा रहे थे। उसी दौरान बिछिया थाना प्रभारी अंकिता मिश्रा, आरक्षक दिलीप, ओम प्रकाश सहित 5 से 6 पुलिसकर्मी अचानक घर में घुस गए। घर में मौजूद 5 लोग – जावेद अहमद, उसका साथी सुमित सोनी निवासी उपरहटी, समीर खान निवासी बिछिया, राहुल मिश्रा निवासी अमिलकी और शिबू खान निवासी बिछिया बैठे हुए थे।

परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने पांचों की तलाशी ली, लेकिन तलाशी में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला। इसके बावजूद आरक्षक दिलीप ने पांचों के मोबाइल फोन छीनकर एक झोले में डाल लिए और पूछताछ के नाम पर सभी को थाने चलने को कहा। इस पूरी घटना की सीसीटीवी फुटेज जावेद के नए मकान में लगी हुई है, जिसमें साफ दिखाई दे रहा है कि उनके पास से कुछ भी बरामद नहीं हुआ।

थाने में 5 की एंट्री, 3 की रिहाई, 2 पर केस – खेल क्या है?

आरोप है कि पांचों को बिछिया थाने के पीछे वाले दरवाजे से अंदर ले जाया गया। थाने के अंदर जावेद अहमद के साथ बुरी तरह मारपीट की गई। कुछ देर बाद थाने के अंदर ही कथित लेन-देन का खेल हुआ और 3 लोगों – सुमित सोनी, समीर खान और राहुल मिश्रा को सामने वाले गेट से चुपचाप छोड़ दिया गया। जबकि जावेद और शिबू खान को थाने में ही रोक लिया गया।

परिजनों ने आरोप लगाया कि आधे घंटे बाद दोनों को बिछिया नदी के पास स्थित छतुरिया घाट धर्मशाला के पास ले जाया गया और वहां फिर से मारपीट की गई। जब मारपीट की आवाज सुनकर मोहल्ले के लोग इकट्ठा होने लगे तो पुलिस दोनों को घसीटते हुए गाड़ी में बैठाकर लक्ष्मणबाग की तरफ ले गई। अंदरूनी चोटों के कारण रात 12:30 बजे जिला चिकित्सालय ले जाकर मेडिकल कराया गया और फिर वापस थाने लाया गया।

पुलिस का दावा और परिवार का सवाल

बिछिया पुलिस का सरकारी रिकॉर्ड कुछ और ही कहता है। पुलिस के अनुसार लक्ष्मणबाग बिछिया नदी के पास दो व्यक्ति अवैध मादक पदार्थ बिक्री हेतु खड़े थे छापामार कार्रवाई में दोनों के पास से 4 किलो 900 ग्राम गांजा जब्त किया गया और एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर न्यायालय में पेश किया गया।

अब सवाल यह है कि जब गिरफ्तारी नए मकान से हुई और वहां कुछ नहीं मिला तो नदी किनारे गांजा कैसे बरामद हो गया? क्या यह फर्जी बरामदगी है? पीड़िता स्वलेहा बेगम पत्नी जावेद अहमद ने रीवा पुलिस महानिरीक्षक और रीवा पुलिस अधीक्षक को लिखित आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

स्वलेहा का कहना है कि घटना स्थल से लेकर थाना बिछिया तक के सभी सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। उन्होंने कुछ दिन पहले सिविल लाइन थाने के मामले का जिक्र भी किया है जहां 11 सीसी कोरेक्स रखकर फंसाने की कोशिश का आरोप लगा था और जांच के बाद थाना प्रभारी को कुर्सी गंवानी पड़ी थी।

फिलहाल इस पूरे मामले ने रीवा पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक तरफ जिले में नशे का काला कारोबार फल-फूल रहा है, तो दूसरी तरफ ऐसे मामलों में निर्दोषों को टारगेट करने के आरोप पुलिस की साख पर बट्टा लगा रहे हैं।

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