लोकसभा में महज 3 मिनट में पास हुआ टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, जानिए क्या है खास

संसद के मानसून सत्र में लगातार जारी राजनीतिक टकराव के बीच केंद्र सरकार ने एक अहम आर्थिक विधेयक को रिकॉर्ड समय में पारित करा लिया। विपक्ष जहां राम मंदिर चढ़ावा चोरी और अन्य मुद्दों को लेकर नारेबाजी कर रहा था, वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पेश किया। महज तीन मिनट के भीतर इस विधेयक को लोकसभा की मंजूरी मिल गई, जिससे इसकी राजनीतिक और आर्थिक अहमियत दोनों बढ़ गई हैं।
हंगामे के बीच रिकॉर्ड समय में पारित हुआ विधेयक
मंगलवार को दोपहर 2:12 बजे वित्त मंत्री ने लोकसभा में विधेयक पेश किया और 2:15 बजे इसे पारित कर दिया गया। सदन में विपक्ष के विरोध और शोर-शराबे के बावजूद सरकार ने बिल को मंजूरी दिला दी। संसद के मौजूदा सत्र में यह सबसे तेज़ी से पारित होने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों में शामिल हो गया।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
सरकार का कहना है कि इस विधेयक का उद्देश्य भारत में निवेश के लिए अधिक भरोसेमंद और स्थिर नीतिगत माहौल तैयार करना है। इससे विदेशी पूंजी को आकर्षित करने, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और वैश्विक कंपनियों के लिए भारत में कारोबार करना आसान बनाने की दिशा में मदद मिलेगी। साथ ही, फंड मैनेजरों के लिए भारत में कामकाज की प्रक्रिया भी सरल होगी।
किन कंपनियों को मिलेगा लाभ?
विधेयक के तहत उन विदेशी कंपनियों को आयकर छूट की अवधि 2040-41 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जो भारतीय फैक्ट्रियों को मशीनरी, उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों की आपूर्ति करती हैं। इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, कंप्यूटर, टैबलेट, सर्वर और उनसे जुड़े प्रमुख पार्ट्स शामिल हैं। इसके अलावा, कस्टम्स वेयरहाउस में पुर्जे रखने वाली कंपनियों को भी कर राहत देने का प्रावधान किया गया है।
अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन का मजबूत केंद्र बन सकता है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, निवेश बढ़ेगा और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए थी।
टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 केवल एक कर संशोधन नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक निवेश और विनिर्माण का प्रमुख केंद्र बनाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि इस विधेयक के प्रावधान ज़मीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू होते हैं और क्या यह वास्तव में भारत में विदेशी निवेश तथा रोजगार के नए अवसर बढ़ाने में सफल साबित होगा।





