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फ्लाइट अचानक क्यों हिलने लगती है? जानिए टर्बुलेंस का विज्ञान और इससे बचने के तरीके

हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ता विमान अचानक तेजी से हिलने लगे या कुछ सेकंड के लिए ऊपर-नीचे हो जाए तो यात्रियों का घबराना स्वाभाविक है। इसे टर्बुलेंस कहा जाता है। ज्यादातर मामलों में यह विमान के लिए गंभीर खतरा नहीं बनता, लेकिन बिना सीटबेल्ट बैठे यात्रियों को तेज झटकों के दौरान गंभीर चोट लग सकती है।

आखिर टर्बुलेंस होता क्या है?

आसान भाषा में टर्बुलेंस हवा में मौजूद उथल-पुथल है। जिस तरह उबड़-खाबड़ सड़क पर कार को झटके लगते हैं, उसी तरह अलग-अलग गति और दिशा में बह रही हवा से गुजरते समय विमान हिल सकता है।

हवा की गति या दिशा में अचानक बदलाव होने पर विमान को ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं झटके महसूस होते हैं।

तीन प्रमुख प्रकार के टर्बुलेंस

टर्बुलेंस कई परिस्थितियों में बन सकता है। तूफानी बादलों और तेजी से ऊपर-नीचे जाती हवा के कारण कन्वेक्टिव टर्बुलेंस होता है। पहाड़ी इलाकों में तेज हवा पर्वतों से टकराकर लहरें बनाती है, जिससे माउंटेन-वेव टर्बुलेंस पैदा हो सकता है।

सबसे चुनौतीपूर्ण प्रकारों में क्लियर-एयर टर्बुलेंस (CAT) शामिल है। यह साफ आसमान में भी हो सकता है और अक्सर ऊंचाई पर तेज गति से बहने वाली जेट स्ट्रीम के आसपास बनता है। बादलों से जुड़ा न होने के कारण इसका पहले से अनुमान लगाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

कब बढ़ जाता है टर्बुलेंस का खतरा?

गर्मी और मानसून में वातावरण में संवहनीय गतिविधियां बढ़ने से तेज झटकों की आशंका बढ़ सकती है। तूफानी बादलों, पहाड़ी क्षेत्रों और जेट स्ट्रीम के आसपास भी टर्बुलेंस मिलने की संभावना रहती है।

हालांकि आधुनिक विमान ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किए जाते हैं। गंभीर टर्बुलेंस में यात्रियों के लिए सबसे बड़ा जोखिम विमान का टूटना नहीं, बल्कि सीट से उछलकर केबिन की छत या अन्य चीजों से टकराना होता है।

सीटबेल्ट क्यों है सबसे जरूरी?

यात्रियों के लिए सबसे आसान सुरक्षा उपाय सीटबेल्ट है। सीटबेल्ट का संकेत बंद होने के बाद भी बैठे रहने के दौरान बेल्ट हल्की-सी बांधे रखना अचानक आने वाले टर्बुलेंस में चोट का जोखिम कम कर सकता है।

टर्बुलेंस शुरू होने पर खड़े होने, ओवरहेड बिन खोलने या केबिन में चलने से बचना चाहिए। बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना और केबिन क्रू के निर्देशों का पालन करना भी जरूरी है।

बदलती जलवायु से बढ़ सकती है चुनौती

वैज्ञानिक अध्ययनों में संकेत मिले हैं कि जलवायु परिवर्तन के साथ कुछ क्षेत्रों में क्लियर-एयर टर्बुलेंस की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि हवाई यात्रा असुरक्षित हो रही है, लेकिन एयरलाइंस और यात्रियों दोनों के लिए टर्बुलेंस को लेकर सतर्कता और बेहतर पूर्वानुमान की जरूरत बढ़ सकती है।

टर्बुलेंस डरावना जरूर महसूस हो सकता है, लेकिन तैयारी और सावधानी जोखिम को काफी कम कर सकती है। उड़ान के दौरान सीटबेल्ट बांधे रखने की छोटी-सी आदत अचानक आए तेज झटके में सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकती है।

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